Geeta Jayanti

  • Date: Thursday, 30 November 2017
  • Event: Geeta Jayanti

 

विक्रम सम्वत् 2074   मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी                                                 30 November

GeetaJayanti

 श्रीमद्भागवतगीता विश्व का एकमात्र ऐसा धार्मिक ग्रंथ है जिसका जन्म दिवस मनाया जाता है क्योकि अन्य ग्रन्थ किसी मनुष्य द्वारा  लिखे या संकलित किये गये हैं. जबकी गीता का जन्म स्वयं श्री भगवान के श्रीमुख से, मार्गशीर्ष मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को  हुआ था. गीता एक सार्वभौम ग्रन्थ है. यह किसी देश, काल धर्म, सम्प्रदाय या जाति विशेष के लिये नही अपितु सम्पूर्ण मानव जाति के  लिये है. इसे स्वयं श्री भगवान ने अर्जुन को निमित्त बनाकर कहा है, इसलिये इस ग्रन्थ में कही भी ' श्री कृष्ण' उवाच शब्द  नही आया है  बल्कि 'श्रीभगवानुवाच' का प्रयोग किया गया है. जिस प्रकार गाय के दूध को बछड़े के बाद सभी धर्म, सम्प्रदाय के लोग पान करते हैं,  उसी प्रकार यह गीता ग्रन्थ  भी सबके लिये जीवनपाथेय स्वरुप है. सभी उपनिषदों का सार ही गोस्वरुप गीता माता हैं. इसे दुहने वाले  गोपाल श्रीकृष्ण हैं, अर्जुनरुपी बछड़े के पीने से निकलने वाला महान  अमृतसदृश दूध ही गीतामृत है.

पूजन विधि -

सुबह स्नाननादि करने पश्चात भागवत गीता-ग्रंथ का पूजन करें. गीता के वक्ता भगवान श्रीकृष्ण, उसके श्रोता नरस्वरुप भक्तप्रवर अर्जुन तथा उसे महाभारत में ग्रथित करने वाले भगवान वेदव्यास का पूजन पूजन करें.

कथा -

महाभारत युद्ध के समय जब दोनों पक्षों की सेनाएं आमने-सामने थी. श्री कृष्ण अर्जुन के रथ के सारथी थे. तब रथ आरुढ़ अर्जुन के सामने शस्त्रयुक्त सेनानियों पर निगाह ड़ाली तो अपने पितामह, गुरु और दूसरे स्वजनों को देखते ही उसके प्राण सूखने लगे. तब अर्जुन ने श्री कृष्ण से कहा कि - अपने स्वजनों को मारकर राज्य की इच्छा नही है. मैं युद्ध नही करना चाहता. तब मोहग्रस्त अर्जुन को भगवान श्रीकृष्ण ने गीता का उपदेश दिया. अर्जुन ने श्रीकृष्ण से अनेकानेक प्रश्न किये. जिनके उत्तर देकर श्रीकृष्ण ने अर्जुन को निराशा से उबारा और वह फ़िर से लड़ने को तैयार हो गया.

निराशा को आशा में बदलने का नाम ही गीता है. वेदों और उपनिशदों का सार है गीता. इस लोक और परलोक दोनों दोनों में मंगलमय मार्ग दिखाने वाला कर्म, ज्ञान और भक्ति - तीनों मार्गों द्वारा मनुष्य को परम श्रेय के साधन का उपदेश करने वाला, सबसे उँचे ज्ञान, सबसे विमल भक्ति, सबसे उज्जवल कर्म, यम, नियम, त्रिविध, तप, अहिंसा, सत्य और दया के उपदेश के साथ-साथ धर्म के लिये धर्म का अवलम्बन कर, अधर्म को त्यागकर युद्ध का उपदेश करनेवाला यह अद्भुत ग्रन्थ है.

गीता में कुल 18 अध्याय हैं. जो महाभारत के भीष्मपर्व में सन्निहित है. गीता सर्वशास्त्रमयी है. गीता हमें जीवन जीने की कला सिखाती है, जीवन जीने की शिक्षा देती है. इसके अध्यायों में इतना सत्य, इतना ज्ञान, इतने उँचे गम्भीर सात्त्विक भरे हैं, जो मनुष्य मात्र को नीची-से-नीची दशा से उठाकर देवताओं के स्थान में बैठा देने की शक्ति रखते हैं. मनुष्य का क्या कर्तव्य है? इसका बोध कराना ही गीता का लक्ष्य है.

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