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महावीर जयंती महात्म्य

Monday, 22 May 2017 13:16

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संदीप कुमार मिश्र:  जब जब मनुष्य अज्ञानता के भंवरजाल फंसता है,तब तब किसी महापुरुष का अवतार इस धराधाम पर होता है।ऐसे ही मानव समाज को अन्धकार से प्रकाश की ओर ले जाने वाले महापुरुष भगवान महावीर का जन्म ईसा से 599 वर्ष पूर्व चैत्र मास के शुक्ल पक्ष में त्रयोदशी तिथि को हुआ था।

हमारे देश में वर्धमान महावीर का जन्मदिन महावीर जयंती के रुप मे बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है। वर्धमान महावीर जैन धर्म के प्रवर्तक भगवान श्री आदिनाथ की परंपरा में चौबीसवें तीर्थंकर हुए थे। वर्धमान महावीर का जन्म एक क्षत्रिय राजकुमार के रूप में एक राज परिवार में हुआ था।इनके पिता का नाम राजा सिद्धार्थ और माता का नाम प्रियकारिणी देवी था। इनका जन्म बिहार के वैशाली राज्य में हुआ था।

कहते हैं तीस वर्ष की उम्र में महावीर स्वामी ने घर-बार छोड़ दिया और कठोर तपस्या द्वारा कैवल्य ज्ञान प्राप्त किया।महावीर स्वामी जी ने श्रद्धा एवं विश्वास द्वारा जैन धर्म की पुन: प्रतिष्ठा स्थापित की तथा आधुनिक काल में जैन धर्म की व्यापकता और उसके दर्शन का श्रेय महावीर स्वामी जी को जाता है।

संपूर्ण संसार को ज्ञान का संदेश देने वाले भगवान महावीर जी ने अपने कार्यों से अपने जीवनकाल में सभी का कल्याण करते रहे।जैन श्रद्धालु इस पावन दिवस को महावीर जयंती के रूप में परंपरागत तरीके से बड़े ही हर्षोल्लास और श्रद्धाभक्ति से मनाते हैं।जैन मतावलंबियों का मानना है कि वर्धमान जी ने घोर तपस्या द्वारा अपनी इन्द्रियों पर विजय प्राप्त कर ली थी, जिस कारण वह विजेता और उनको महावीर कहा गया और उनके अनुयायी संसार में जैन कहलाए।

देशभर में तप से जीवन पर विजय प्राप्त करने का पर्व महावीर जयंती के रूप में मनाया जाता है। श्रद्धालु मंदिरों में भगवान महावीर की मूर्ति को विशेष स्नान कराते हैं, जो कि अभिषेक कहलाता है।वहीं भगवान की मूर्ति को सिंहासन या रथ पर बिठा कर उत्साह और हर्षोउल्लास पूर्वक जुलूस निकाले जाते हैं। जिसमें बड़ी संख्या में जैन धर्मावलम्बी शामिल होते हैं।

चौबीस ‍तीर्थंकरों के अंतिम तीर्थंकर महावीर के जन्मदिवस प्रति वर्ष चैत्र शुक्ल त्रयोदशी को मनाया जाता है। जैन समाज द्वारा दिन भर अनेक धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है महावीर का जन्मोत्सव संपूर्ण भारत में धूमधाम से मनाया जाता है।आपको बता दें कि वर्धमान महावीर जी को 42 वर्ष की अवस्था में जूभिका नामक गांव में ऋजूकूला नदी के किनारे घोर त्पस्या करते हुए जब अनेकों वर्ष बीत गए तब उन्हें मनोहर वन में साल वृक्ष के नीचे वैशाख शुक्ल दशमी की पावन तिथि के दिन कैवल्य ज्ञान की प्राप्ति हुई। जिसके पश्चात वह महावीर स्वामी बने।और देश भर में भ्रमण करके लोगों में फैली कुरूतियों एवं अंधविश्वासों को दूर करने का निरंतर प्रयास किया साथ ही धर्म की वास्तविकता को स्थापित कर सत्य एवं अहिंसा का समाज में संदेश दिया।

इस वर्ष महावीर जयंती 19 अप्रैल 2016, को देशभर में बड़े ही धूमधाम से मनाई जाएगी।आप सभी स्नेहीजनो को महावीर जयंती की हार्दिक शुभकामनाएं न बधाई। 

 

http://sandeepaspmishra.blogspot.in/2016/04/blog-post_95.html

 

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