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गंगा दशहरा महात्म्य

Tuesday, 23 May 2017 11:13

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संदीप कुमार मिश्र: हमारे धर्म शास्त्रों मैं ऐसा कहा गया है कि गंगा दशहरा के दिन मानव जीवन में गंगा स्नान का विशेष फलदायी है। इसी विशेष दिन में पतित पावनी मां गंगा का स्वर्ग से धरती पर अवतरण हुआ था, इसलिए गंगा दशहरा को हमारे देश में महापुण्यकारी पर्व के रूप में बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है।आज के पावन अवसर पर मोक्षदायिनी मां गंगा की विशेष पूजा अर्चना की जाती है।

दरअसल दोस्तों मां गंगा का पावनता का अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि गंगा के संपर्क में आते ही मनुष्य के जन्नों-जन्मो के पाप धुल जाते हैं, निष्कलंक हो जाते हैं। शास्त्रों में ऐसा गया है कि राजा सगर के मृत पुत्रों का उद्धार करने के लिए मां गंगा धरती पर अवतरित हुईं थीं और तब से अब तक सदियों से मोक्षदायिनी मां गंगा निरंतर मानव जीवन की नकारात्मकता को खत्म कर समस्त संसार में सकारात्मकता का संचार कर रही है।

इसमें कोई संदेश नहीं कि वो अद्भूत समय रहा होगा जव मां गंगा का अवतरण इस धरा धाम पर हुआ होगा।मां गंगा की पूजा के लिए यह विशेष तिथि है, ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की दशमी।

आपके मन में एक सवाल अवश्य उठ रहा होगा कि क्या है गंगा दशहरा का महत्व।हमारे सनातन धर्म शास्त्रों में एसा वर्णित है कि-

मां गंगा पर्वत राज हिमालय और मैना की पुत्री हैं और भगवान विष्णु के अंगूठे से निकलती हैं।जिन्हें महर्षि भगीरथ ने घोर तपस्या के बाद  राजा सगर के पुत्रों के उद्धार के लिए धरती पर आने की विनती की थी।वहीं मान्यता ये भी है कि गंगा दशहरा के दिन ही गायत्री मंत्र का आविर्भाव हुआ था। इस दिन गंगा स्रोत का पाठ करना भक्तों के लिए विशेष फलदायी है।संभव हो तो तो  10 दीपक अवश्य जलाने चाहिए व 10 वस्तुओं का दान करना चाहिए।

ज्योतिषिय गणना के अनुसार इस साल गंगा दशहरा पर वही योग है, जो सतयुग में गंगा अवतरण के अवसर पर थे। ऐसे में इस बार गंगा दशहरा का महत्व बढ़ जाता है। वराह पुराण में ऐसा वर्णित है कि गंगा हस्त नक्षत्र में ज्येष्ठ शुक्ल दशमी तिथि को स्वर्ग से पृथ्वी पर उतरी थीं। 12 साल बाद इस बार फिर वही योग बना है।

गंगा दशहरा पर दान-पुण्य का महत्व

आज के पावन अवसर यानि गंगा दशहरा के दिन दान-पुण्य का विशेष महत्व है।इस दिन दान स्वरुप सत्तू, मटका और हाथ का पंखा दान करने से दुगुना फल प्राप्त होता है। गंगा दशहरा के दिन किसी भी नदी में स्नान करके दान और तर्पण करने से मनुष्य जाने-अनजाने में किए गए कम से कम दस पापों से मुक्त हो जाता है। इन दस पापों के हरण होने से ही इस तिथि का नाम गंगा दशहरा पड़ा है।शास्त्रों में गंगा दशहरा महात्म्य के बारे में विशेष रुप से बताया गया है।

गंगा दशहरा पूजन विधि और व्रत  

मित्रों गंगा दशहरा का व्रत भगवान विष्णु को प्रसन्न करने के लिए किया जाता है। इस दिन भगवान विष्णु की विशेष रुप से साधक को पूजा-अर्चना करनी चाहिए। इस दिन लोग निराजल व्रत रखते हैं। एकादशी की कथा सुनते हैं और अगले दिन दान-पुण्य करते हैं।

अंतत: पतित पावनी मां गंगा...मोक्षदायिनी मां गंगा का अवतर इस धरा धाम पर जगत के कल्याण के लिए ही हुआ है।अत: हम सब की जिम्मेदारी है कि अविरंग गंगा,निर्मल गंगा को बनाये रखें।मां गंगा सब का कल्याण करें।जय मां गंगे।

http://sandeepaspmishra.blogspot.in/2016/06/blog-post.html

 

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