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करवा चौथ : रिश्तों की मजबूत डोर

Wednesday, 24 May 2017 06:18

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संदीप कुमार मिश्र : हमारे देश में रिश्तो की अहमियत को भला कौन नहीं जानता या कौन नहीं मानता। ये रिश्ता ही तो है जो हमारी पहचान को विश्व पटल पर बनाए हुए है।रिश्तों का संसार बसता है हमारे देश में।ऐसा ही एक रिश्ता है पति- पत्नी का।जो जुड़ा हैआपसी  स्नेह और विश्वास पर।जो ऐसे मजबुत धागे की जोर में बंधा है जिसकी दुसरा कोई सानी नहीं है। भावनाओं का पर्व यानि कि करवाचौथजिसका इंतजार सुहागिन औरतें बड़ी बेसब्री से करती है। संबंधों से परे हम अपनी कल्पना भी नहीं करते। हमारे जीवन की गाड़ी तक नहीं चल पाती।पति-पत्नी का रिश्ता एक गाड़ी के दो पहिओं के समान हैं जिनका एक दूसरे के बिना रह पाना मुश्किल है।हर एक रिश्तों में बांटने काला भी कोई हो सकता है लेकिन प्रेम और स्नेह का पवित्र रिश्ता अनुठा  अकल्पनिय है। इन रिश्तों को मजबूत करने में हमारे हिन्दू त्यौहार अहम भूमिका अदा करते है।निश्चिततौर पर प्यार और सद्भावना का पर्व है करवाचौथ।जिसका इंतजार भारतीय औरतें बड़ी ही बेसब्री से करती हैं।अपने पति की लम्बी आयु और अच्छे स्वास्थय की कामना करती हुई औरतें निर्जला व्रत रखती हैं।रात को चांद के दीदार होने के बाद ही अपने पति के हाथ से व्रत खुलवाती हैं।

करवा चौथ जो हिन्दूओं का प्रमुख त्यौहार है उसे पूरे भारत की महिलाएं बड़ी ही शिद्दत से मनाती हैं।ये त्यौहार कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को मनाया जाता है।इस व्रत को हर सुहागिन महिला रखती है।वो चाहे ग्रामीण महिला हो या शहर की औरतेंअमीर हो या गरीब। औरत अपने पति की लम्बी आयु और खुशहाली की कामना करती हुई इस व्रत को बड़ी ही श्रद्धा और उत्साह के साथ रखती हैं।

हमारे देश में हर एक त्यौहार मनाने के पीछे जुड़ी होती है प्राचीन कथाएं।करवा चौथ के पीछे भी जुड़ी है कई कथाएं।कहा जाता है कि एक राजा की एक बेटी और सात बेटे थे।जब उसने अपना पहला व्रत रखा तो वो मायके आ गई कहते हैं।उसने पहला व्रत मायके में रखा।अपनी बहन को सातों भाई बहुत ही प्यार करते थे।वो अपनी बहन को खाना खिला कर ही खुद खाना खाते थे।जब व्रत के दौरान अपनी बहन को भूख से व्याकुल होते भाईयों ने देखा तो उनसे रहा नहीं गया और अपनी बहन को झूठा चांद दिखा कर बहन को भोजन खिला दिया।इसी दौरान वो कशीदाकारी करती रहीलेकिन जब वो ससुराल में गई तो वो अपने पति के शरीर पर सुईयां चुभी देखकर हैरान हो गई।उसने इसका कारण पूछा तो उसके पति ने कहा कि तुमने व्रत के दौरान कशीदाकारी करती रही ये उसी का ही नतीजा है।ये सारी सुईयां मुझे चुभती रही हैं।उसे अपने पति के शरीर में धसी सुईयों को निकालने में पूरा एक साल बीत जाता है।इस दौरान दूसरा करवा चौथ आ जाता है।जब वो अपने पति के शरीर से सुईयां निकाल रही होती है तो इसी मौके पर करवा बेचने वाला आता है वो अपने पति के पास नौकरानी को छोड़कर खुद करवा लेने चली जाती है।राजा के शरीर पर जो चार पांच सुईयां जो बची रहती है उसे वो नौकरानी निकाल देती है।इस तरह राजा नौकरानी को अपनी पत्नी और अपनी पत्नी को नौकरानी समझने लगता है।एक दिन राजा घर से बाहर सामान लेने जाता है वो अपनी पत्नी जो नौकरानी होती और जो नौकरानी से रानी बनी होती है उससे कहता है कि आपने कुछ मंगवाना है तो जो नौकरानी से रानी बनी होती है वो राजा से अपने श्रृंगार का सामान मंगवाती है।लेकिन जो रानी से नौकरानी बनी होती है वो राजा से मंगवाती है काठ की गुड़िया.वो हमेशा उस गुड़िया से खेलती रहती है और गुड़िया से खेलती हुई कहती है-

महारानी थी वो गोली हुईगोली थी वो महारानी हुई

राजा जब महारानी से नौकरानी बनी अपनी पत्नी  से ये गीत सुनता है तो इसका मतलब पूछता है।जिसके बाद महारानी राजा को सारी बात बताती हुई कहती है कि वो कैसे महारानी से नौकरानी बनीफिर राजा उसे कहता है-

गोली थी वो गोली हुईमहारानी थी वो महारानी हुई

इस तरह राजा को सारी असलियत पता चलता है। हमारे देश हर हिस्से में ये व्रत बड़े ही उत्साह और उल्लास के साथ मनाती है।सुबह प्रात- काल उठकर ही महिलाएं शिव पार्वती की पूजा करती हैं और कोरे करवे में पानी भर कर पूजा की जाती है। वैसे भी हमारे पुराणों के अनुसार भगवान शिव और पार्वती की पूजा करने से परिवार में सुख शान्ति बनी ही रहती है। इस दिन महिलाएं कोई भी काम नहीं करतीखासकर सिलने पिरोने का तो कतई नहीं।

अपने पति की लम्बी आयु की कामना करती हुई औरतें भगवान से यही प्रार्थना करती है कि उनका पति हमेशा खुशहाल जीवन जिये। पूरा दिन व्रत रखने के बाद शाम को बारी आती है पूजा करने की यानि कि थाली बटाने की रस्म की और कथा सुनने की। सभी सौभाग्यवती स्त्रियां एक गोल दायरे में बैठ जाती हैं और एक दूसरे से थाली बंटाती हैं।पूजा के दौरान करवे के ऊपर 13 बिंदी रखी जाती हैं और साथ ही गेहूं या चावल के 13 दाने हाथ में लेकर कथा सुनने की परंपरा है।कथा सुनने के बाद करवा हाथ में घुमाकर अपनी सासू मां के पैर छू कर उनसे आशीर्वाद लिया जाता है।सास-बहु के बीच प्रेम को बढ़ाने में बायने का अहम महत्व है ।सास को हमेशा ही बहू से मिलने वाले बायने का इंतजार रहता है।बायना मिलने पर सास बहु के गिले शिकवे दूर होते हैं।बायना में सासु मां के कपड़े और मिठाईयां होती हैं। कहते हैं कि बायना देने के लिए मिट्टी का टोंटीदार करवा लेकर करवे में गेहूं और ढक्कन में शक्कर का भूरा भर दें और इसके ऊपर दक्षिणा भी रखें।रोली से करवे पर स्वस्तिक बना कर गौरी गणेश की पूजा करते हुए अपने पति की लम्बी आयु की कामना करें।चांद दिखने पर छलनी की ओट चांद को देखकर चन्द्रमा को अर्घ्य दें।इसके बाद पति परमेश्वर का आशीर्वाद लें।पति देव को भोजन कराएं और खुद भी भोजन करें।करवा पूजन के बाद आस पड़ोस की औरतों को करवे की बधाई देने की परंपरा भी भी बमारे धर्म में बतायी गई है।

आज हमारे समाज में एकल परिवार की धारणा बढ़ती जा रही हैजिससे की परिवार टुटने की संभावनाएं जन्म लेती हैंअपने जीवन संगिनी को काम की अधिकता होने की वजह से अक्सर यूवा समय नहीं दे पाते हैं जिसके कारण परिवार टूट जाता है।ऐसे में संबंधो को जोड़े रखने में करवाचौथ अहम भुमिका अदा करता है।

      पूजा मुहूर्त का समय

करवा चौथ का पूजा मुहूर्त = 05:33से 06:52

अवधि = 1 धंटा 18 मिनट्स

करवा चौथ के दिन चन्द्रोदय = 20:26

चतुर्थी तिथि प्रारम्भ = 30/अक्टूबर/2015 को 08:24 बजे

चतुर्थी तिथि समाप्त = 31/अक्टूबर/2015 को 06:25 बजे

करवा चौथ की व्रत विधि –

सूर्योदय से पहले स्नान कर के व्रत रखने का संकल्प लें और सास दृारा भेजी गई सरगी खाएं। सरगी में  मिठाई फल सेंवई पूड़ी और साज-श्रंगार का समान दिया जाता है। प्याज औऱ लेहसुन से बनी सरगी ना खाएं।

सरगी करने के बाद करवा चौथ का निर्जला व्रत प्रारंभ करें। महिलाएं आज के दिन मां पार्वती महादेव शिव व गणेश जी का ध्यान पूरे दिन अपने मन में करती रहें।

दीवार पर गेरू से फलक बनाकर पिसे चावलों के घोल से करवा चित्रित करें। इस चित्रित करने की कला को करवा धरना कहा जाता है जो कि सदियों पुरानी परंपरा है।

आठ पूरियों की अठावरी बनाएं। हलुआ बनाएं। पक्के पकवान बनाएं।फिर पीली मिट्टी से मां गौरी और गणेश जी का स्वरूप बनाएं। इन स्वरूपों की पूजा संध्याकाल के समय करें।

माता गौरी को लकड़ी के सिंहासन पर विराजें और उन्हें लाल रंग की चुनरी पहना कर अन्य सुहाग का सामान औरश्रृंगार अर्पित करें। फिर उनके सामने जल से भरा कलश रखें।

बायना देने के लिए मिट्टी का टोंटीदार करवा लें। गेहूं और ढक्कैन में शक्कपर का बूरा भर दें। उसके ऊपर दक्षिणा रखें। रोली से करवे पर स्वा स्तिक बनाएं।

गौरी गणेश के स्वररूपों की पूजा करें। इस मंत्र का जाप करें - 'नमः शिवाय शर्वाण्यै सौभाग्यं संतति शुभाम्‌। प्रयच्छ भक्तियुक्तानां नारीणां हरवल्लभे॥' ज्यादातर महिलाएं अपने परिवार में प्रचलित प्रथा के अनुसार ही पूजा करती हैं। हर क्षेत्र के अनुसार पूजा करने का विधान और कथा अलग-अलग होता है। इसलिये कथा में काफी ज्यादा अंतर पाया गया है।

अब करवा चौथ की कथाकहानी सुननी चाहिये। कथा सुनने के बाद आपको अपने घर के सभी वरिष्ठ लोगों का चरण स्पर्श कर आशिर्वाद लेना चाहिये।

रात्रि के समय छननी के प्रयोग से चंद्र दर्शन करें उसे अर्घ्य प्रदान करें। फिर पति के पैरों को छूते हुए उनका आर्शिवाद लें। जिसके बाद पति देव को प्रसाद दे कर भोजन करवाएं और बाद में खुद भी करें।

इस प्रकार इस पावन त्योहार का पालन करना चाहिए।जिससे घर में सुख शांती का वास हो और जीवन यात्रा निरंतर बीना किसी बाधा के चलता रहे।

 

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