शुभ मुहुर्त में बांधे रक्षा बंधन

Tuesday, 23 May 2017 10:35

संदीप कुमार मिश्र : नाजुक बंधन में बंधा मजबूत रिश्ते की डोर।हमारे देश में हर रिश्ता ईश्वर का दिया हुआ एक अनमोल उपहार है,जिसे बनाए रखना हमारा फर्ज भी है और नैतिक जिम्मेदारी भी।इन्हीं रिश्तों में से एक है भाई बहन के प्यार भरे रिश्तों का त्योहार रक्षा-बन्धन।जिसे हमारे देश के हर हिस्से में बड़े ही हर्ष और उल्लास के साथ मनाया जाता है। भाई-बहन के रिश्ते को मजबूती देता रक्षा-बंधन का पर्व देश में एकता और अखंडता की मिसाल भी पेश करता है।

रक्षा बंधन बांधने का उपयुक्त समय-

रक्षा बन्धन पर अनुष्ठान का समय-05:55से14:56

समय -9 घण्टे

रक्षा बन्धन के लिये दोपहर का मुहूर्त -13:42 से14:56

समय -1 घण्टा 14 मिनट्स

रक्षा बन्धन (18 अगस्त 2016)के दिन भद्रा सूर्योदय से पहले समाप्त हो जाएगी

पूर्णिमा तिथि प्रारम्भ - 17अगस्त2016 को 16:27 बजे

पूर्णिमा तिथि समाप्त - 18अगस्त2016 को 14:56 बजे

रक्षा बंधन बांधने का मंत्र-

येन बद्धो बलिः राजा दानवेन्द्रो महाबलः।

तेन त्वामभिबध्नामि रक्षे मा चल मा चल॥

हमारे देश में रक्षा-बन्धन का पवित्र त्यौहार श्रावण मास की पूर्णिमा तिथि को देश भर में बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। ज्योतिषशास्त्र के अनुसार अपराह्न का समय रक्षा-बन्धन बांधने के लिए उचीत समय माना जाता है जो कि हिन्दु समयानुसार दोपहर के बाद का समय है।ऐसे में मान लें कि यदि दोपहर के समय भद्रा हो तो प्रदोष काल के समय बहने रक्षा बन्धन अपने भाईयों की कलाईयों पर बांध सकती है।हमारे धर्म शास्त्रों में भद्रा का समय रक्षा बन्धन के लिये उपयुक्त नहीं माना जाता है। हमारे सभी हिन्दु ग्रन्थ और पुराण विशेष मुहुर्त में ही रक्षा बंधन बांधने की सलाह देते हैं।

रक्षा बंधन बांधने शुभ मुहुर्त दिन भर

मित्रों आपको बता दें कि इस बार रक्षा बंधन के पर्व पर भद्रा का साया नहीं है।इसलिए रक्षा सूत्र बांधने के लिए भद्राकाल देकने की आवश्यकता नहीं है।बहने अपने बाई को दिन भर शुभ मुहुर्त में रक्षा बंधन बांध सकती है।ऐसा संयोग तीन साल बाद बना है। हमारे हिन्दू धर्म शास्त्रो में भद्रा को सुर्य की पुत्री और शनी देव की बहन बताया गया है।कहने हैं शनी की तरह ही भद्रा का स्वभाव भी उग्र है।अत: किसी भी प्रकार के शुभ कार्य को करने से पहले हमारी हिन्दू संस्कृति में भद्रा की गणना की जाती है।और भद्रा में कोई भी शुभ कार्य नहीं किया जाता है।

सिंहासन-गौरी योग में रक्षा बंधन: भाई बहन के लिए रहेगा शुभ

इस बार रक्षाबंधन के पवित्र पर्व पर सिंहासन और गौरी योग का दुर्लभ संयोग बन रहा है।कहते हैं सिंहासन योग राजपाट का प्रतीक है और गौरी योग खुशहाली का।इस प्रकार ये दोनों योग मंगलकारी हैं, शुभता प्रदान करने वाले हैं।इसीलिए कहा जाता है कि सिंहासन योग एक तरफ जहां रक्षा बंधन पर भाई को सफलता दिलाएगा,तो वहीं गौरी योग बहनों के जीवन में खुशहाली लेकर लाएगा।हमारे धर्मपुराणों में कहा गया है कि देवगुरु बृहस्पति की सलाह पर देवराज इंद्र ने असुरों पर विजय प्राप्त करने के लिए रक्षाबंधन का सुझाव दिया था।और तभी से रक्षा बंधन के पर्व को मनाने का चलन शुरु हुआ।जैसा कि इस बार रक्षा बंधन का पर्व गुरुवार को ही है इसलिए इस बार का रक्षा बंधन का पर्व हर तरह शुभ और भाई बहनो के लिए हितकारी है।

 

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