श्री हित अम्बरीष जी

धन्य है वृंदावन की धरती जहां पर श्री हरि विष्णु के अवतार श्रीकृष्ण ने अपनी बाल लीलाओं से जगत को कृतार्थ किया…  इसी पुण्य भूमि पर  आध्यात्मिक गुरू हितांबरीश जी अपने प्रवचनों से जनमानस का कल्याण कर रहे हैं।

 

हितांबरीश जी का बाल्यकाल हरियाणा के हिसार में बीता और वहीं उनकी  शिक्षा-दीक्षा भी हुई…

 9 अक्टूबर 1983 को इस धरा पर आए हितांबरीश जी आधनुिक युग में वृंदावन की धरा पर एक ऐसे महाराज के रुप में विश्वविख्यात हैं जो आत्मा से परमात्मा तक सहज मार्ग से ले जाते हैं ।

 

गुरूजी श्रीराम शरणम के अविभाज्य हिस्सा रहे… बाल्यकाल की अवस्था से ही गुरूजी का झुकाव धर्म और प्रभु की ओर हुआ,  श्रीरामचरित मानस और श्रीमद्भागवत का पाठ वे बचपन से ही करते आ रहे हैं ।

 

समय का चक्का जैसे जैसे चलता रहा  गुरूजी की ख्याति भी धीरे-धीरे जगत में फैलने लगी और वर्तमान में हजारों - लाखों लोग उन्हें अपना गुरू मानते हैं… वे ना केवल एक अध्यापक की भांति हैं अपुति वे सभी जो सत्य औऱ आत्मज्ञान की खोज में हैं…  आत्मसाक्षात्कार कर सत्य की खोज में है उनके मित्र और उनके लिए ईश्वरीय  मार्ग प्रशस्त करने वाले हैं जो उन्हे अज्ञान रूपी अंधकार से ज्ञान रूपी प्रकाश को ओर ले जाते हैं।

 

परमश्रद्धेय आदरणीय अंबरीश जी को सभी ‘महाराज जी’ कहकर संबोधित करते हैं…  महाराज जी वर्ष 2006 से ही भक्ति योगा और अपने प्रवचनों से देश-विदेश के जातकों का कल्याण कर रहे हैं… महाराज जी के प्रवचनों में श्री कृष्ण की कृपा पाने एवं उनके ह्रदय मे स्थान बनाने और उनको रिझाने के लिए उनका अपने जीवन पर आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए राधानाम और  राधाजी की शरण ही इस संपूर्ण धरा पर सर्वोत्तम हैं ।

 

महाराज श्रीराधावल्लभ संप्रदाय से हैं और आचार्य हितांहरिवंश जी के पद चिन्हों पर चल रहे हैं श्री राधा के चरणों में अपने वात्सल्य और प्रेम को प्रदर्शित करते हुए महाराज जी के प्रवचनों में इसकी झलक देखने को मिलती है। 

महाराज जी बताते हैं कि सेवा का प्रदर्शन आदिशक्ति - परमपिता परमात्मा  के प्रति अपने प्रेम को प्रदर्शित करने का सबसे अच्छा माध्यम है राधावल्लभ संप्रदाय में अष्टायाम सेवा का श्रेय श्री हितांहरिवंश जी को जाता है।

 

अपने प्रवचनों और विचारों में महाराज जी परमपिता परमात्मा की सेवा को सर्वोत्तम बताते हैं और वे ये मानते है कि इसके लिए उन्हें कोई मान्यता की आवश्यकता नहीं है ... श्रीहितांबरीश जी एक गायक और प्रवचन कर्ता  के रूप में मानव जाति के लिए पुरस्कार की भांति हैं उनके भजनों में श्रीराधा कृष्ण जी  का वर्णन किसी चलचित्र की भांति लगता है। 

परमपिता परमात्मा से महाराज का जुड़ाव भक्तों को उनके साथ जोड़ने में सहायक होता है ईश्वर का प्रेम पाने के लिए आतुर और जीवन के मर्म को समझने के लिए महाराज जी के प्रवचनों में एक अद्भुत शक्ति-प्रेम और वात्सल्य को भक्त पाते हैं। 

 

आधुनिक समाज के लोग भी उनके विचारों से भलीभांति परिचित हो रहे हैं और उनके विचारों को अपनाकर जीवन का कल्याण कर रहे हैं...बड़ी संख्या में लोग उनके प्रवचनों को सुनकर प्रभु के दिखाए मार्ग पर आगे बढ़ रहे हैं और उनके प्रवचनों को सुनकर उनके अनन्य भक्त बनते जा रहे हैं ।

स्वयं से प्रभु को जानने के मार्ग को, अंबरीश जी अपनी यात्रा को कुछ इस प्रकार परिभाषित करते हैं कि प्रभु में रमने की यात्रा आत्मा से अंतर्रात्मा पाने का मार्ग है। हितांबरीश जी के प्रवजन श्रीमद् भक्तमाल पर आधारित हैं जिसे श्रीनभ जी महाराज ने अपनी लेखनी से अपनी ह्रदयवाणी को पटल पर साकार किया है।

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