Shardiya Navratri 2020 : व्रत में क्यों किया जाता है फलाहार,धर्म और विज्ञान का क्या है मत ?

 

Dharm-News/ Shardiya Navratri 2020- आद्य शक्ति की भक्ति का पवित्र माह नवरात्रि।जिसमें शारदीय नवरात्रि का और भी विशेष महत्व हमारे धर्म शास्त्रों में बताया गया है।हिन्दू सनातन धर्म में नवरात्रि में माता को भक्त नौ दिनों तक व्रत रहकर माता की पूजा आराधना करते हैं।अलग अलग पूजा में व्रत के नियम भिन्न भिन्न होते हैं।बात करें शारदीय नवरात्री की तो इन नौ दिनो में लेहसुन-प्याज तक वर्जित बताया गया है...आखिर क्या है फलाहार का धार्मिक और वैज्ञानिक आधार।आईए जानते हैं ?

नवरात्रि में फलाहार क्यों है जरुरी ?

शारदीय नवरात्रि 2020 की शुरुआत 17 अक्टूबर से हो रही है।भक्ति भाव के साथ माता के भक्त पूजा आराधना तो करते ही है साथ ही नौ दिनो तक व्रत भी रहते हैं,और कुछ लोग पहले और आखिरी दिन का व्रत रहते हैं।जो भी साधक व्रत रखते हैं वो फलाहार ले सकते हैं, जिसमें आप फल,जूस,दूध और मावा की बनी मिठाई ले सकते हैं।साथ ही कुट्टू का आटा और साबूदाने की बनी चीजों को भी ले सकते हैं लेकिन अनाज का सेवन बिल्कुल भी नहीं कर सकते हैं।

आखिर क्या वजह है कि व्रत में अन्न वर्जित है ?जानिए

धर्म के अनुसार- हमारे सनातन धर्म की मान्यताओं के अनुसार व्रत हमारे मन और शरीर को पवित्र बनाता है।ऐसा करने से मानव मन परमात्मा की भक्ति पाठ शांत मन से कर पाता है।व्रत करने से इच्छाशक्ति प्रबल होती है।ऐसा कहा जाता है कि व्रत करने से हम परमात्मा के करीब हो जाते है,साथ ही व्रत साधना करने से मां दुर्गा प्रसन्न होती है।

विज्ञान के अनुसार- शारदीय नवरात्रि के शुभ अवसर पर व्रत करने के सिर्फ धार्मिक ही नहीं वैज्ञानिक महत्व भी बताए गए हैं।व्रत की प्रमाणिकता को विज्ञान भी मान्यता देता है।साल में दो बार आने वाली नवरात्रि के दौरान मौसम के बदलने का समय होता है और बदलते मौसम में शरीर को रोगमुक्त रखने के लिए नौ दिनो का व्रत स्वास्थ्य और आरोग्य प्रदान करता है।

आयुर्वेदिक मान्यता के अनुसार- आदि काल में हमारे तपस्वी ऋषि मुनि कठोर तप किया करते थे और इस दौरान वे सिर्फ फल-फूल और पेय पदार्थ का ही सेवन करते थे।जिसका परिणाम होता था कि उनका शरीर विषैले तत्वों से बचा रहता था।क्योंकि आयुर्वेद की मान्यता है कि ऋतु परिवर्तन के समय मांसाहार और लहसुन प्याज से परहेज करना चाहिए।क्योंकि मौसम बदलते समय शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमतका कम होती है,इसलिए हलका और सुपाच्य भोजन ही ग्रहण करना चाहिए।और ऐसे भी हम सब जानते हैं कि व्रत रहने से हमारा पाचन तंत्र दुरुस्त रहता है,इसलिए भक्ति भाव के साथ माता की आराधना करें और फलाहार व्रत रहें।  

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