Navratra2020: क्यूं मनाई जाती है वर्ष में दो बार नवरात्रि ? जानिए गूढ़ रहस्य !

 

Dharm Samachar/News Desk/Navratra2020-

या देवी सर्वभूतेषु शक्ति-रूपेण संस्थिता।

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

मां दुर्गा की भक्ति उपासना का पावन पर्व नवरात्रि।आप जानते हैं क्यों मनाया जाता है, क्यों की जाती है माँ दुर्गा की नौ दिनों तक पूजा ? इस संबंध में हमारे धर्म शास्त्रों में दो कथाओं का वर्णन मिलता है ।

नवरात्रि की प्रथम कथा के अनुसार-

ऐसा कहा जाता है कि लंका युद्ध में ब्रह्माजी ने प्रभु श्रीराम से रावण-वध के लिए चंडी देवी का विधि विधान से पूजन कर भगवती को प्रसन्न करने को कहा था और चंडी पूजन और हवन के लिए दुर्लभ 108 नीलकमल की व्यवस्था भी की थी।वहीं लंकापति रावण ने भी अमरत्व प्राप्त करने के लिए चंडी पाठ किया।रावण के इस संकल्प को पवन देव के माध्यम से इन्द्रदेव ने प्रभु श्रीराम तक पहुँचवा दी।

लेकिन मायावी रावण ने प्रभु श्रीराम की पूजा को बाधित करने के लिए पूजास्थल से एक नीलकमल गायब करवा दिया था।ऐसे में प्रभु श्रीराम को अपना संकल्प टूटता नज़र आने लगा।जिससे वानर सेना में भय व्याप्त हो गया कि कहीं माता भगवती नाराज ना हो जाएं तभी मर्यादापुरुषोत्तम प्रभु श्रीराम जी को स्मरण हो आया कि उन्हें..कमल-नयन नवकंज लोचन.. भी कहा जाता है तो क्यों न एक नेत्र को वह माँ की पूजा में समर्पित कर दें। इसी संकल्प के साथ जब प्रभु श्रीराम ने जैसे ही तूणीर से अपने नेत्र को निकालना चाहा तभी आकाश में एक गर्जना हुई और माँ दुर्गा प्रकट हुईं और कहा कि वह पूजा से प्रसन्न हुईं और उन्होंने प्रभु श्रीराम को विजयी भव: का आशीर्वाद दिया।

वहीं दूसरी तरफ़ दशानन रावण की पूजा के समय महाबली हनुमान जी ब्राह्मण बालक का रूप धरकर वहाँ पहुँच गए और पूजा कर रहे ब्राह्मणों से एक श्लोक..जयादेवी..भूर्तिहरिणी..में हरिणी के स्थान पर करिणी उच्चारित करा दिया। हरिणी का अर्थ होता है भक्त की पीड़ा हरने वाली और करिणी का अर्थ होता है पीड़ा देने वाली। इससे माँ दुर्गा रावण से नाराज़ हो गईं और रावण को श्राप दे दिया।जिसका परिणाम हुआ कि लंकापति रावण का सर्वनाश हो गया।

नवरात्रि की दूसरी कथा के अनुसार-

अब बात नवरात्रि की दूसरी कथा की,जिसके अनुसार महिषासुर को उसकी उपासना से ख़ुश होकर देवताओं ने उसे अजेय होने का वर प्रदान कर दिया था।अजेय का वरदान पाकर महिषासुर ने उसका दुरुपयोग प्रारंभ कर दिया।परिणामस्वरुप महिषासुर ने सूर्य, चन्द्र, इन्द्र, अग्नि, वायु, यम, वरुण और अन्य देवतओं के भी अधिकार छीन महिषासुर स्वर्गलोक का मालिक बन बैठा।

महिषासुर के दुस्साहस से क्रोधित होकर देवताओं ने माँ दुर्गा की रचना की और महिषासुर का वध करने के लिए समस्त देवताओं ने अपने सभी अस्त्र-शस्त्र माँ दुर्गा को दिए।जिसे पाकर माँ दुर्गा ने नौ दिनों तक महिषासुर के साथ युद्ध किया और अन्तत: महिषासुर का वध करके माँ दुर्गा महिषासुरमर्दिनी कहलाईं ।

दो बार नवरात्रि वर्ष भर में क्यों ?

हमारे देश में नवरात्रि सालभर में दो बार मनाया जाने वाला इकलौता उत्सव है- एक चैत्र नवरात्रि तो दूसरी शारदीय नवरात्रि ।मतलब गर्मी और ठंड के मौसम में सौर-ऊर्जा हमें सबसे अधिक प्रभावित करती है। और इशी दौरान फसल पकने, वर्षा जल के लिए बादल संघनित होने, ठंड से राहत देने आदि जैसे जीवनोपयोगी कार्य संपन्न होते हैं। इसलिए पवित्र शक्तियों की आराधना करने के लिए यह समय सबसे उपयुक्त माना जाता है।

हम जानते हैं कि प्रकृति में बदलाव से हमारे जीवन,शरीर में बदलाव आते हैं। इसलिए शारीरिक और मानसिक संतुलन बनाए रखने के लिए हम उपवास रखकर शक्ति की पूजा करते हैं।वहीं इसे सत्य और धर्म की जीत के रूप में भी देशभर में बड़े ही उत्साह और उल्लास के साथ मनाया जाता है,साथ ही  अयोध्या नरेश मर्यादापुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के जन्मोत्सव के रूप में भी मनाया जाता है।

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