शारदीय नवरात्रि 2020: जाने ज्योतिर्विद पं.शिव कुमार शुक्ल से शारदीय नवरात्रि के महत्व और माँ दुर्गा की साधना के बारे में....

 

ऊँ सर्व मंगल मंगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके।

शरण्ये त्र्यंबके गौरी नारायणी नमोस्तुते।।

श्री शुभ संवत् 2077 मासानाम मासोत्मे मासे,

शुद्ध आश्विन मासे, शुक्ल पक्षे, प्रतिपदा तिथि, दिन-शनिवार,

चित्रा नक्षत्र, विष्कुम्भ योग।

दिनांक 17 अक्टूबर 2020 को शारदीय नवरात्रि प्रारंभ हो रहा है।

शारदीय नवरात्रि के प्रारंभ में कलश स्थापना और ध्वजा रोहण,पूजा साधक को अभिजीत मुहूर्त में करना चाहिए।

।।समय 11 बजकर 28 मिनट से 12 बजकर 23 मिनट तक है।।

लेकिन अभिजीत मुहूर्त में पूजा अर्चना एवं कलश स्थापना हो सके तो ऐसे में आप सुबह से शाम तक उसी दिन घट स्थापना कर सकते हैं। जगत जननी मां जगदम्बा आस्था, विश्वास और श्रद्धा पूर्वक पूजा पाठ करने वाले अपने भक्तों से सदैव प्रसन्न रहती हैं।

    शारदीय नवरात्रि की शुरुआत इस वर्ष शनिवार से हो रही है ऐसे में किसी जातक को शनि, राहू और केतु की महादशा,अन्तर दशा और प्रत्यन्तर दशा हो या शनि की साढ़ेसाती, शनि की ढैया चल रही हो तो इन सबकी ग्रह शांति करने का ये सबसे उपयुक्त समय है।

 

17 अक्टूबर 2020 को माँ शैलपुत्री

18 अक्टूबर 2020 को माँ ब्रह्मचारिणी

19 अक्टूबर 2020 को माँ चन्द्रघण्टा

20 अक्टूबर 2020 को माँ कुष्माण्डा

21 अक्टूबर 2020 को माँ स्कन्दमाता

22 अक्टूबर 2020 को माँ कात्यायनी

23 अक्टूबर 2020 को माँ कालरात्रि

24 अक्टूबर 2020 को माँ महागौरी

25 अक्टूबर 2020 को माँ सिद्धिदात्री

25 अक्टूबर को महानवमी है, इसलिए हवन इत्यादि करके कन्या भोजन, फल मिष्ठान, दक्षिणा वस्त्र देकर भगवती स्वरुपा कन्या से आशीर्वाद लें।भाव के साथ ऐसा करने से मनचाहा फल,धन-धान्य, सौभाग्य, पुत्र-रत्न की सहज ही प्राप्ति होगी और जीवन में खुशहाली आएगी

नौ दिनो तक व्रत रहने वाले साधकों को 26 अक्टूबर 2020 को पारण करना चाहिए ।जो जातक नौ दिन व्रत रह सकें वो प्रतिपदा और अष्टमी का व्रत रहें या फिर सप्तमी, अष्टमी और नवमी का व्रत रहे।ऐसा करने से भी उन्हें पूरे नौ दिन व्रत रहने का फल प्राप्त हो जाएगा। 

आद्य शक्ति माँ भगवती प्रेम की भूखी हैं इसलिए विश्वास के साथ पूजा, अर्चना, पाठ, दान पुण्य श्रद्धा के साथ और खुश होकर करें।माता की साधना आराधना को कतई सिर का भार समझ कर ना करें ।हमारे सनातन धर्म में शारदीय नवरात्रि के व्रत का बड़ा विशेष महत्व और विधान बताए गए हैं।

माँ दुर्गा की आराधना से होगीं सभी मनोकामनाएं पूरी

जिस घर परिवार में किसी भी तरह की परेशानियां हो, कलह हो, बच्चों का पढ़ाई में मन ना लग रहा हो, अशान्ति, गृह कलेश, मानसिक चिंता और परिवार में किसी तरह की मन की मालिन्यता हो वो माता की साधना से दूर हो जाती है।

जो भी सनातन धर्म प्रेमी पांच वर्ष तक लगातार शारदीय नवरात्रि पर माँ दुर्गाजी की पूजा करवाता है,व्रत रहता है उसे मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है।माँ भगवती की कृपा आप सभी पर सदैव बनी रहे।जय माता दी।

ज्योतिर्विद पंडित शिव कुमार शुक्ल

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