शरद पूर्णिमा 2020: ज्योतिर्विद् पंडित शिव कुमार शुक्ल से जानिए शुभ मुहूर्त,व्रत विधि और आर्थिक सम्पन्नता के उपाय

 

धर्म डेस्क/ शरद पूर्णिमा विशेष: श्री शुभ संवत् 2077 मासानाम् मासोत्समे मासे, शुद्ध आश्विन मासे, शुक्ल पक्षे, चतुर्दशी उपरान्ते शरद् पूर्णिमायाम्, तिथि, दिन-शुक्रवार, दिनांक 30 अक्टूबर 2020 पंचांग के अनुसार पूर्णिमा का व्रत रखने का हमारे धर्म शास्त्रों में शास्त्रीय विधान है।जनसामान्य शरद पूर्णिमा को कौमुदी और कोजागरी के नामों से भी जानता है।

हमारे धर्म शास्त्रों में ऐसी पौराणिक मान्यता है कि शरद पूर्णिमा को ही भगवान कृष्ण ने महारास रचाया था। धार्मिक मान्यता है कि शरद पूर्णिमा को रात्रि चन्द्रमा की किरणों से अमृत की बूंदें पृथ्वी पर गिरती है। इसीलिए शरद पूर्णिमा की रात्रि में खीर बनाकर छत पर रखने की भी परम्परा है, शरद पूर्णिमा को रात्रि को खासतौर पर चांदनी रात भी कहा जाता है, इस दिन चन्द्रमा देखने में बहुत सुंदर,अद्वितीय नजर आता है।

शरद पूर्णिमा का समय और शुभ मूहुर्त:

शरद पूर्णिमा के दिन चन्द्रोदय:

दिनांक 30 अक्टूबर 2020 दिन-शुक्रवार को 5 बजकर 25 मिनट से शुरू हो जायेगा

शरद पूर्णिमा तिथि का समापन:

शनिवार, दिनांक-31अक्टूबर 2020 को 7 बजकर 31 मिनट पर ही समाप्त हो जायेगा ।

शरद् पूर्णिमा का व्रत:-

शरद् पूर्णिमा का व्रत बड़ा विशेष माना गया है, ऐसी मान्यता है कि शरद् पूर्णिमा का व्रत रखने से रोग से मुक्ति मिलती है, जो लोग गम्भीर रूप से पीड़ित हैं, उनके लिए शरद् पूर्णिमा का व्रत विशेष फलदाई माना गया है।

विशेषतौर पर शरद् पूर्णिमा को शाम के समय 30 तारीख को खीर बनाएं और इस खीर को रात्रि के समय चन्द्रमा की किरणों में रखें और अगले दिन खीर को प्रसाद रुप में सपरिवार ग्रहण करें।

व्रत,दान पूण्य और सत्यनारायण भगवान की कथा 31 तारीख को दिन में करें और सूने, शाम को 7.30 बजे से पहले चंद्रमा को अर्घ दें।इस प्रकार शरद पूर्णिमा की पूजा संपन्न करें।

शरद पूर्णिमा व्रत से लाभ:

-शरद् पूर्णिमा का व्रत जीवन में सुख समृद्धि लाता है।

-शरद् पूर्णिमा का व्रत संतान की आयु के लिए रखा जाता है।

-शरद पूर्णिमा व्रत सभी प्रकार के विघ्नों को दूर करने वाला है। यह व्रत पुरुष और महिलाएं सभी रख सकते हैं।

-शरद् पूर्णिमा के दिन रात्रि में लक्ष्मी, इन्द्र और कुबेर की भी पूजा अर्चना करें।

 

                                                          पुराणों में कहा गया है कि पूरे साल में केवल इसी दिन चंद्रमा 16 कलाओं से युक्त होता है. यही कारण है कि आसमान से अमृत बरसता है।

-शरद् पूर्णिमा का व्रत या सभी प्रकार के पूर्णिमा का व्रत जो भी रखता उसे जीवन में उन्नति तरक्की मिलती है और सभी प्रकार की बाधाएं जीवन से समाप्त हो जाती है।

                                                                                         शरद् पूर्णिमा की आप सभी देशवासियों को हार्दिक मंगलमय शुभकामनाएं।

ज्योतिर्विद पंडित शिव कुमार शुक्ल

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