499 साल बाद इस दिवाली पर बन रहा ये दुर्लभ योग ज्योतिर्विद पंडित शिव कुमार शुक्ल, जानिए दिवाली का शुभ मुहूर्त

 

Dharm-Desk/ श्री शुभ संवत 2077 मासानाम मासोत्तमे मासे, कृष्ण पक्षे, चतुर्दश्यां तिथौ, शनि वासरे, स्वाति नक्षत्रे,आयुष्मान योगे उपरान्ते शोभन योगे दिनांक 14/11/2020 को दिवाली शनिवार के दिन 01 बजकर 49 मिनट के बाद अमावस्या से प्रदोषकाल संपूर्ण रात्रि में व्याप्त है। दिवाली का शुभ पर्व इसी समय और शुभ मुहूर्त मनाया जाएगा।

यही दिवाली का मुख्य काल प्रदोष काल है। इसके साथ स्वाती नक्षत्र  रात्रि (8 बजकर 47 तक)योग तथा सिंह लग्न वृष(सायं 5 बजकर 33 से रात्रि 7.30 बजे तक)की प्रधानता होती है।इस दिन का स्थिर लग्न कुंभ (01.49 से 2.28 तक),सिंह लग्न(रात्रि 12.01 से 2.15 मिनट) तक है।

दिनांक 14/11/2020 शनिवार प्रदोशकाल में वृष लग्न का स्वाति नक्षत्र में योग प्रदोष काल (सूर्यास्त पश्चात 5 बजकर 33 मिनट में प्राप्त है। अत:दिवाली पूजन प्रदोष काल में स्वाति नक्षत्र युक्त स्थिर लग्न वृष में करना उत्तम है। दूसरा स्थिर लग्न सिंह रात्रि 12.01 मिनट से 2 बज कर 15 मिनट तक मिल रहा है तथा निशिथ काल रात्रि 11 . 34 से रात्रि 12 .27 मिनट तक है।इसमें रात्रि स्थिर लग्न सिंह तथा निशिथ  काल का योग  12.01 मिनट से प्राप्त है।इस योग में महाकाली पूजन हेतू उत्तम है। इसके अतिरिक्त दिन में स्थिर लग्न कुंभ, दिन 12-57 से दिन 2 बजकर 28 मिनट तक है....दिवाली के दिन प्रदोष काल तथा इन स्थिर लग्नों में लक्ष्मी,गणेश,कुबेरादि देवताओं का पूजन होगा।

लक्ष्मी पूजा 2020 का शुभ मुहूर्त

शुभ मुहूर्त 14 नवम्बर को शाम 5.33 मिनट से 7.24 मिनट तक है(अवधि 1 घंटा 56 मिनट )तक है।वहीं प्रदोष काल 5.33 बजे से शाम 8.07 तक रहेगा।अमावस्या को तिथि 14 नवम्बर 2020 को दोपहर 2.17 बजे से 15 नवम्बर 2020 को सुबह 10.36 बजे तक रहेगी।

दीपावली का शुभ त्योहार इस साल 14 नवम्बर शनिवार को मनाया जाएगा।इस दिन हर घर में देवी लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा की जाती है और लोग धन धान्य सुख संबृद्दि की कामना करते हैं।इस दिन घरों,दुकानों,और दफ्तरों में दीयों,मिट्टी के बर्तनों,जगमगाती रोशनी और फूलों से सजाया जाता है।लक्ष्मी पूजा के दिन शाम को लोग पारंपरिक परिधानों से सजधज कर पूजा करते हैं।

यह त्योहार आध्यात्मिक रुप से अन्धकार पर प्रकाश की जीत,अज्ञान पर ज्ञान,बुराई पर अच्छाई और निराशा पर आशा की जीत का प्रतीक है।धनतेरस के दिन से दिवाली का त्योहार शुरु हो जाता है,उसके बाद नरक चतुर्दशी को यम के नाम का दीपक जलाने की परंपरा है।इसके अगले दिन अमावस्या के दिन दिवाली (लक्ष्मी पूजन का दिन मनाते हैं।

सुख-समृद्धि मंत्र

या रक्ताम्बुजवासिनी विलासिनी चण्डांशु तेजस्विनी।

या रक्ता रुधिराम्बरा हरिसखी या श्री मनोल्हादिनी॥

या रत्नाकरमन्थनात्प्रगटिता विष्णोस्वया गेहिनी।

सा मां पातु मनोरमा भगवती लक्ष्मीश्च पद्मावती ॥

कलश स्थापना,गणेश गौरी,नवग्रह की पूजा तथा लभ्मी की पूजा ,कुबेर की पूजा तथा बही-खाता,दावात वगैरह की पूजा भाव से करें।

दिवाली में दीपक की महत्वपूर्ण भूमिका होती है और खासकर मिट्टी के दीपक का विशेष महत्व दिवाली में होता है।मिट्टी, आकाश,जल,अग्नि,और वायु इन पंच तत्वों से हमारा शरीर बना और इन्हीं पंच तत्वों से मिलकर दीया और सनातन वैदिक धर्म अनुष्ठान में पंचतत्वों की उपस्थिति अनिवार्य होती है।आप अन्य प्रकार के दीपक भी जलाएं लेकिन प्राथमिकता में मिट्टी का दीया ही घर ले आएं।

दिवाली पर घर के द्वार पर,आंगन में रंगोली अवश्य बनाएं। पीली कौड़ी को देवी लक्ष्मी की प्रतीक माना जाता है।दिपावली के दिन चांदी और तांबे के सिक्के के साथ कौड़ी का भी पूजन करें। पूजन के बाद कौड़ी को लाल कपड़े में बांधकर तिजोरी और जेब में रख सकते हैं।ऐसा करने से धन की वृद्धि होती है।

इस दिवाली तांबे का सिक्का कलश में डालें इससे घर में शांति और समृद्धि के द्वार खुलेंगे।मंगल कलश भूमि पर कुंभ से अष्ट दल कमल की आकृति बनाकर उस कलश स्थापित करें।कलश कांस्य,रजत, ताम्र में कलश में गंगा जल भरकर आम पत्ते रखें और उपर से नारियल रखें।कलश पर स्वस्तिक बनाएं और कलस में लाल कपड़ा या मौली बांधे।फल नैवेद्य इत्यादि चढ़ाएं।

जानिए दिपावली के दिन क्या देखना शुभ है-

दिपावली के दिन गाय,बिल्ली,छिपकली,छछुंदर,उल्लू देखना बड़ी ही शुभ है।

499 साल बाद इस दिवाली पर बन रहा है ये दुर्लभ योग

ज्योतिर्विद पंडित शिव कुमार शुक्ल जी का कहना है कि इस दिवाली ग्रहों का बड़ा खेल देखने को मिलेगा। दिवाली पर गुरु ग्रह अपने स्वराशि धनु और शनि अपने स्वराशि मकर में रहेगा, जबकि शुक्र ग्रह कन्या राशि में रहेगा। बताया जा रहा है कि दिवाली पर तीन ग्रहों का यह दुलर्भ संयोग 2020 से पहले 1521 में बना था। ऐसे में गुरु,शनि आर्थिक स्थिति को मजबूत करता है।यह संयोग 499 साल बाद बन रहा है।

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