Chhath Puja 2020: सूर्योपासना के महापर्व छठ मनाने की परंपरा रामायण और महाभारत काल से...

 

धर्म/समाचार- सूर्य उपासना का महापर्व छठ,लोक आस्था का महापर्व छठ।जिसे मनाने की परंपरा कोई नई नहीं है।आस्था के इस महापर्व को मनाने की परंपरा सदियों पुरानी है। रामायण और महाभारत काल से ही छठ महापर्व की पूजा होती आ रही है।मूल रुप से छठ महापर्व सूयोर्पासना का पर्व है। इसलिए, इसे सूर्य षष्ठी व्रत के नाम से भी जाना जाता है। भगवान भाष्कर की उपासना उनकी कृपा प्राप्त करने के लिए की जाती है।

श्रद्धालूओं के मन में ऐसा विश्वास है कि इस दिन सूर्यदेव की अराधना करने से व्रती को सुख, सौभाग्य और समृद्धि की प्राप्ति होती है और उसकी सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। इस पर्व के आयोजन का उल्लेख प्राचीन ग्रंथों में भी पाया जाता है। इस दिन नदियों, तालाब या फिर किसी पोखर के किनारे पर पानी में खड़े होकर सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है।      

छठ पर्व पहले बिहार, झारखंड और उत्तर भारत में ही मनाया जाता था, लेकिन अब धीरे-धीरे पूरे देश में ये पर्व बड़े ही श्रद्धा भाव के साथ मनाया जाने लगा।इतना ही नहीं विदेशों में अप्रवासीयों के द्वारा छठ पर्व उल्लास के सात मनाया जाता है । छठ पर्व षष्ठी का अपभ्रंश है। इस कारण इस व्रत का नामकरण छठ व्रत हो गया। छठ वर्ष में दो बार मनाया जाता है। पहली बार चैत्र में और दूसरी बार कार्तिक माह में। चैत्र शुक्लपक्ष षष्ठी पर मनाए जाने वाले छठ पर्व को चैती छठ और कार्तिक शुक्लपक्ष षष्ठी पर मनाए जाने वाले पर्व को कार्तिकी छठ कहा जाता है।      

चार दिनो तक मनाए जाने वाले छठ पूजा में नहाय-खाय, खरना या लोहंडा, संध्या अर्घ्य और सूयोर्दय अर्घ्य महत्वपूर्ण है। छठ की पूजा में गन्ना, फल, डाला और सूप आदि का प्रयोग किया जाता है। मान्यताओं के अनुसार, छठी मइया को भगवान सूर्य की बहन बताया गया है। इस पर्व के दौरान छठी मइया के अलावा भगवान सूर्य की पूजा-आराधना होती है। कहा जाता है कि जो व्यक्ति इन दोनों की अर्चना करता है उनकी संतानों की छठी माता रक्षा करती हैं। कहते हैं कि भगवान की शक्ति से ही चार दिनों का यह कठिन व्रत संपन्न हो पाता है।       

छठ को लेकर कई कथाएं हैं। एक कथा के अनुसार, महाभारत काल में जब पांडव अपना सारा राजपाट जुए में हार गए तब द्रौपदी ने छठ व्रत किया। इससे उनकी मनोकामनाएं पूर्ण हुईं तथा पांडवों को राजपाट वापस मिल गया। इसके अलावा छठ महापर्व का उल्लेख रामायण काल में भी मिलता है।

वहीं एक और मान्यता के अनुसार, छठ या सूर्य पूजा महाभारत काल से की जाती है। कहते हैं कि छठ पूजा की शुरुआत सूर्य पुत्र कर्ण ने की थी। कर्ण भगवान सूर्य के परम भक्त थे। मान्याताओं के अनुसार, वे प्रतिदिन घंटों कमर तक पानी में खड़े रहकर सूर्य को अर्घ्य देते थे। सूर्य की कृपा से ही वे महान योद्धा बने थे।

भगवान भास्कर और छठी मईया की कृपा आप सभी पर सदैव बनी रहे।जय छठी मईया।।

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