Dev Deepawali 2020: जाने कब है देव दिवाली,क्या है तिथि, शुभ मुहूर्त और क्या है मनाने की विधि,महत्व

 

धर्म डेस्क- दीपावली के 15 दिन बाद विश्व की प्राचीनतम बाबा विश्वनाथ की नगरी वाराणसी में देव दिवाली का पर्व बड़ी धूमधाम के साथ मनाया जाता है। देवों की इस दिवाली पर वाराणसी के घाटों को दीयों की रौशनी से सजाया जाता है इतना ही नहीं देव दिवाली की रात संपूर्ण बनारस भी रौशनी से नहा उठता है। ऐसी धार्मिक मान्यता है कि देव दिवाली पर देवलोक से 33 कोटि देवी देवता वाराणसी में उत्सव मनाने आते हैं। चलिए जानते हैं कि इस वर्ष देव दिवाली का त्योहार कब मनाया जाएगा और क्या है इसका धार्मिक और पौराणिक महत्व । 

देव दिवाली 2020 कब मनाई जाएगी

कार्तिक पूर्णिमा के दिन हर साल मुख्य दिवाली से 15 दिनों के बाद देव दिवाली मनायी जाती है। इस साल देव दिवाली 29 नवंबर 2020 को मनायी जाएगी। 

देव दीपावली 2020 शुभ मुहूर्त

29 नवंबर 2020

देव दीपावली 2020 शुभ मुहूर्त

प्रदोषकाल देव दीपावली मुहूर्त - शाम 5 बजकर 08 मिनट से शाम 07 बजकर 47 मिनट तक

पूर्णिमा तिथि प्रारम्भ - दोपहर 12 बजकर 47 मिनट से (29 नवम्बर 2020)

पूर्णिमा तिथि समाप्त - अगले दिन दोपहर 02 बजकर 59 मिनट तक (30 नवम्बर 2020)

देव दीपावली पूजा विधि

1. देव दीपावली के दिन साधक को गंगा स्नान अवश्य करना चाहिए और स्नान के बाद साफ वस्त्र धारण करने चाहिए।

2. इस दिन भगवान शिव और भगवान विष्णु की पूजा की जाती है। लेकिन इनकी पूजा से पहले भगवान गणेश की विधिवत पूजा अवश्य करें।

3.भगवान शिव को इस दिन पूजा में पुष्प, घी, नैवेद्य, बेलपत्र अर्पित करें और भगवान विष्णु को पूजा में पीले फूल, नैवेद्य, पीले वस्त्र, पीली मिठाई अर्पित करें।

4. इसके बाद भगवान शिव और भगवान विष्णु की विधिवत पूजा करें और देव दीपावली की कथा सुनें।कथा सुनने के बाद भगवान गणेश, भगवान शिव और भगवान विष्णु की धूप व दीप से आरती उतारें।

5.अंत में भगवान शिव और भगवान विष्णु को मिठाई का भोग लगाएं और शा्म के समय गंगा घाट पर दीपक जलाएं। यदि आप ऐसा नहीं कर सकते तो अपने घर के मुख्य द्वार पर तो दीपक अवश्य जलाएं।

देव दिवाली का धार्मिक महत्व

ऐसी मान्यता है कि कार्तिक पूर्णिमा के दिन भगवान शिव ने त्रिपुरासुर नाम के राक्षस का वध किया था। त्रिपुरासुर के वध के बाद समस्त देवी-देवताओं ने मिलकर खुशी मनाई थी। इसलिए सभी देवी-देवता भगवान शंकर संग धरती पर आते हैं और दीप जलाकर खुशियां मनाते हैं। तभी से काशी में कार्तिक पूर्णिमा के दिन देव दिवाली मनाने की परंपरा चली आ रही है। इस दिन दीपदान करने का विशेष महत्व होता है।

इस दिन किया जाता है गंगा स्नान

कार्तिक मास की पूर्णिमा को त्रिपुरी पूर्णिमा या गंगा स्नान के नाम से भी जाना जाता है। शास्त्रों में ऐसा वर्णित है कि कार्तिक पूर्णिमा के दिन गंगा स्नान करने से पूरे वर्ष गंगा स्नान करने का फल प्राप्त होता है । इस दिन गंगा सहित पवित्र नदियों एवं तीर्थों में स्नान करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है और पापों का नाश होता है।आप सभी को देव दिवाली की हार्दिक शुभकामनाएं बधाई।

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