आज से शुरु हो रहा मार्गशीर्ष मास, जानिए मार्गशीर्ष मास के महत्व और व्रत-त्योहार

 

धर्म डेस्क/मार्शीर्ष मास- हिंदू वर्ष के 9वें माह यानी मार्गशीर्ष मास की शुरुआत कार्तिक पूर्णिमा के बाद यानी 1 दिसंबर से शुरू हो  रहा है।जिसे आम बोलचाल की भाषा में इस माह को अगहन मास भी कहा जाता है। धार्मिक नजरिये से मार्गशीर्ष महीने का सनातन धर्म में बड़ा ही अधिक महत्व बताया गया है। इस माह में पूर्वजों को याद करते हुए उनके प्रति आभार प्रकट करने के साथ ही दान पुण्य करने का विधान है।आईए जानते हैं मार्गशीर्ष माह के विशेष महत्व के बारे में और दिसंबर में पड़ने वाले महत्वपूर्ण त्योहारों के बारे में-

इसी माह में श्रीकृष्ण ने अर्जुन को दिया था उपदेश

योगेश्वर भगवान श्रीकृष्ण को मार्गशीर्ष मास अतिप्रिय है। योगेश्वर भगवान भक्तवत्सल हैं।भगवान ने स्वयं अपनी वाणी से कहा है कि मार्गशीर्ष मास स्वयं मेरा ही स्वरूप है।धार्मिक मान्यता के अनुसार इस पवित्र माह में तीर्थाटन और नदी स्नान से पापों का नाश होने के साथ ही मनोकामनाओं की पूर्ति होती है। मार्गशीर्ष के पवित्र मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी को ही भगवान श्रीकृष्ण ने कुरुक्षेत्र के मैदान में अर्जुन को गीता का उपदेश सुनाया था। इसलिए इस दिन गीता जयंती भी मनायी जाती है। इस माह में गीता का दान भी शुभ माना जाता है। गीता के एक श्लोक में स्वयं भगवान श्रीकृष्ण ने मार्गशीर्ष मास की महिमा बताते हुए कहते हैं-

बृहत्साम तथा साम्नां गायत्री छन्दसामहम्।

मासानां मार्गशीर्षोऽहमृतूनां कुसुमाकरः

अर्थात- गायन करने योग्य श्रुतियों में मैं बृहत्साम, छंदों में गायत्री तथा मास में मार्गशीर्ष और ऋतुओं में बसंत हूं।शास्त्रों में मार्गशीर्ष का महत्व बताते हुए कहा गया है कि हिन्दू पंचांग के इस पवित्र मास में गंगा, युमना जैसी पवित्र नदियों में स्नान करने से रोग, दोष और पीड़ाओं से मुक्ति मिलती है।मार्गशीर्ष यानी दिसंबर के इस महीने में कई बड़े और महत्वपूर्ण त्योहार पड़ते हैं आईए जानते हैं-

7 दिसंबर, कालभैरव जयंतीः कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को कालभैरव अष्टमी के रूप में मनाई जाती है। काल भैरव बीमारी, भय, संकट और दुख को हरने वाले स्वामी माने जाते हैं।

10 दिसंबर, उत्पन्ना एकादशीः हिन्दू पंचांग के अनुसार, उत्पन्ना एकादशी का व्रत मार्गशीर्ष मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को किया जाता है। एकादशी का दिन भगवान विष्णु को समर्पित है।

12 दिसंबर, प्रदोष व्रतः 12 दिसंबर को को कृष्ण प्रदोष व्रत रखा जाएगा। प्रदोष व्रत भगवान शिव का आशीर्वाद पाने के लिए रखा जाता है। यह व्रत प्रति माह में दो बार (कृष्ण और शुक्ल पक्ष में) त्रयोदशी तिथि के दिन रखा जाता है।

13 दिसंबर, मासिक शिवरात्रिः हिंदू कैलेंडर के अनुसार, प्रत्येक महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मासिक शिवरात्रि मनाई जाती है। ये दिन भगवान शिव को समर्पित होता है। इस दिन मासिक शिवरात्रि का व्रत रखा जाता है।

14 दिसंबर, मार्गशीर्ष अमावस्याः इस तिथि को अगहन और पितृ अमावस्या, अगहन व दर्श अमावस्या भी कहा जाता है। धार्मिक रूप से इस अमावस्या का महत्व भी कार्तिक अमावस्या के समान ही फलदायी माना जाता है। इस दिन भी माता लक्ष्मी का पूजन शुभ माना जाता है। स्नान, दान व अन्य धार्मिक कार्यों के लिये भी यह दिन बहुत शुभ है। दर्श अमावस्या को पित्रों का पूजन किया जाता है जिससे पित्र दोष खत्म हो जाता है। इस साल मार्गशीर्ष अमावस्या के दिन सूर्य ग्रहण भी लग रहा है।

15 दिसंबर, धनु संक्रांतिः  सूर्य देव 15 दिसंबर मंगलवार के दिन धनु राशि में प्रवेश करेंगे और इस राशि में ये 14 जनवरी 2021 तक स्थित रहेंगे। सूर्य के गोचर को संक्रांति कहा जाता है।

19 दिसंबर, विवाह पंचमीः अमावस्या के बाद शुरू होगा मार्गशीर्ष माह का शुक्ल पक्ष। मार्गशीर्ष मास की शुक्ल पंचमी को विवाह पंचमी भी कहा जाता है। माना जाता है प्रभु श्री राम का माता सीता से विवाह इसी दिन संपन्न हुआ था। इसलिये यह दिन मांगलिक कार्यों के लिये भी बहुत शुभ माना जाता है।

25 दिसबंर, मोक्षदा एकादशीः  मोक्षदा एकादशी यानी मोह का नाश करने वाली। इसलिए इसे मोक्षदा एकादशी कहा गया है।ऐसी मान्यता है कि इस एकादशी का उपवास रखने वाले व्रती को मोक्ष की प्राप्ती होती है।साथ ही ऐसी मान्यता भी है कि हिंदूओं के महत्वपूर्ण धार्मिक ग्रंथ श्रीमद्भगवदगीता की उत्पत्ति भी इसी दिन हुई थी। इसी दिन वैकुण्ठ एकादशी भी मनाई जाएगी। इसलिये इस दिन को गीता जयंती के रूप में भी मनाया जाता है।

30 दिसंबर, मार्गशीर्ष पूर्णिमा व दत्तात्रेय जयंतीः मार्गशीर्ष पूर्णिमा का भी धार्मिक दृष्टि से बहुत महत्व है। इस दिन को दत्तात्रेय जयंती के रूप में भी मनाया जाता है। दत्तात्रेय, भगवान विष्णु का स्वरूप ही माने जाते हैं।

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