Jaya Ekadashi 2021: जया एकादशी, जानिए शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, व्रत और महत्वस

 

धर्म डेस्क- जया एकादशी को अत्‍यंत पुण्‍यदायी और कल्‍याणकारी माना गया है. हिन्‍दू मान्‍यताओं के अनुसार इस एकादशी (Ekadashi) का व्रत करने से व्‍यक्ति बुरी योनि यानी भूति पिशाच की योनि में जन्‍म नहीं लेता है. इतना ही इस व्रत के प्रताप से व्‍यक्ति के सभी पापों का नाश होता है और घर में सुख-संपत्ति आती है. पौराणिक मान्‍यता के अनुसार दुखदरिद्रता और कष्‍टों को दूर करने के लिए जया एकादशी का व्रत करना सर्वोत्तम साधन है.

जया एकादशी कब है

हिन्‍दू पंचांग के अनुसार जया एकादशी हर साल माघ महीने के शुक्‍ल पक्ष को आती है . यह हर साल जनवरी या फरवरी महीने में पड़ती है. इस बार जया एकादशी 23 फरवरी 2021 को है.

जया एकादशी की तिथि और शुभ मुहूर्त

जया एकादशी की तिथि: 23 फरवरी 2021,मंगलवार

एकादशी तिथि प्रारंभ: 22 फरवरी 2021 को रात 5 बजकर 20 मिनट से

एकादशी तिथि समाप्‍त: 23 फरवरी 2021 को रात 6 बजे तक

पारण का समय: 24 फरवरी 2021 को सुबह 6 बजकर 01 मिनट से 9 बजकर 09 मिनट तक

जया एकादशी का महत्‍व

हिन्‍दू धर्म में माघ शुक्‍ल में आने वाली जया एकादशी का विशेष महत्‍व है. मान्‍यता है कि इसका व्रत करने से मनुष्य ब्रह्म हत्यादि पापों से छूट कर मोक्ष को प्राप्त होता है. यही नहीं इसके प्रभाव से भूतपिशाच आदि योनियों से भी मुक्त हो जाता है. मान्‍यता है कि इस दिन विधिपूर्वक व्रत करने और श्री हरि विष्‍णु की पूजा करने से व्‍यक्ति बुरी योनि से छूट जाता है. कहते हैं कि जिस मनुष्य ने इस एकादशी का व्रत किया है उसने मानो सब यज्ञजपदान आदि कर लिए. प्राचीन मान्‍यताओं के अुनसार जो मनुष्य जया एकादशी का व्रत करता है वह अवश्य ही हजार वर्ष तक स्वर्ग में वास करता है.

जया एकादशी की पूजा विधि

- एकादशी के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्‍नान करें और फिर भगवान विष्‍णु का ध्‍यान करें.

- अब व्रत का संकल्‍प लें.

- अब घर के मंदिर में एक चौकी में लाल कपड़ा बिछाकर भगवान विष्‍णु की प्रतिमा स्‍थापित करें.

- अब एक लोटे में गंगाजल लें और उसमें तिलरोली और अक्षत मिलएं.

- इसके बाद इस लोटे से जल की कुछ बूंदें लेकर चारों ओर छिड़कें.

- फिर इसी लोटे से घट स्‍थापना करें.

- अब भगवान विष्‍णु को धूप-दीप दिखाकर उन्‍हें पुष्‍प अर्पित करें.

- अब घी के दीपक से विष्‍णु की आरती उतारें और विष्‍णु सहस्‍नाम का पाठ करें.

- इसके बाद श्री हरि विष्‍णु को तिल का भोग लगाएं और उसमें तुलसी दल का प्रयोग अवश्‍य करें.

- इस दिन तिल का दान करना अच्‍छा माना जाता है.

- शाम के समय भगवान विष्‍णु की पूजा कर फलाहार ग्रहण करें.

- अगले दिन यानी कि द्वादशी को सुबह किसी ब्राह्मण को भोजन कराएं व दान-दक्षिणा देकर विदा करें. इसके बाद स्‍वयं भी भोजन ग्रहण कर व्रत का पारण करें.

जया एकादशी के अलावा, एक साल में 23 एकादशी व्रत आते हैं जो हिंदू कैलेंडर के कृष्ण और शुक्ल पक्ष में आते हैं। इन सभी एकादशी तिथि हिंदू परंपराओं में बहुत महत्वपूर्ण हैं और विभिन्न एकादशी नाम के साथ लोकप्रिय और फलदायी हैं।

।। ऊँ नमो भगवते वासुदेवाय ।।

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