Holi Utsav 2021: होली के त्योहार के बारे में कितना जानते हैं आप ? जानिए दिलचस्प तथ्य

 

व्रत/पर्व/त्योहार: फाल्गुन माह की पूर्णिमा में होलिकोत्सव बड़ी धूमधाम के साथ मनाया जाता है। होली का त्योहार होलिका दहन से प्रारंभ होता है और रंगपंचमी तक चलता है।इसी बीच में धुलेंडी आती है। पूरे देश में होली और रंगपंचमी को धूमधाम से मनाया जाता है। बात करे मथुरावृंदावन और बरसाने की तो वहां की विश्व प्रसिद्ध होली में हर कोई शरीक होना चाहता है।

चलिए जानते है होली से संबंधित कुछ दिलचस्प तथ्य जिन्हें जाने बगैर होली का रंग अधूरा है-

वसंत ऋतु का आगमन : होली की त्योहार वसंत ऋतु के प्रारंभ से ही शुरु हो जाता है। इस ऋ‍तु के आगमन के स्वागत के लिए गांवों में प्रकृति पूजा होती है। इस ऋतु में होलीधुलेंडी, रंगपंचमीबसंत पंचमीनवरात्रिरामनवमीनव-संवत्सरहनुमान जयंती और गुरु पूर्णिमा उत्सव मनाए जाते हैं। इनमें से रंगपंचमी और बसंत पंचमी जहां मौसम परिवर्तन की सूचना देते हैं वहीं नव-संवत्सर से नए वर्ष ,नव संवत्सर की शुरुआत होती है।

भक्त प्रहलाद की याद में मनाते हैं होली : होलिकोत्सव भगवान श्रीहरि विष्णु के अनन्य भक्त प्रहलाद की याद में मनाया जाता है। इस दिन हिरण्यकश्यप की ब्रह्मा से नहीं जलने का वरदान प्राप्त बहिन होलिका भक्त प्रहलाद को गोद में लेकर बैठ थीलेकिन होलिका जल गई और प्रहलाद बच गए थे। इसीलिए होलिका दहन के समय होलिका और भक्त प्रहलाद की पूजा की जाती है।

भांग,ठंडाई का मजा : होलिका दहन से रंगपंचमी तक भांगठंडाई शर्बत पीने का प्रचलन हैं। होलिकोत्सव पर लोग मजे से भांग छानते हैं और रंगों का उत्सव मनाते हैं। इस दिन विशेषरुप से फाग गाते हैं और रंगारंग कार्यक्रम किए जाते हैं। होली गीत के कार्यक्रम के दौरान ठंडाई और मिठाई का वितरण किया जाता है।

धुलेंडी का रंग : होलिका दहन के बाद देश के कई हिस्सों में धुलेंडी अर्थात धूलिवंदन मनाया जाता है। इस दिन लोग एक-दूसरे से गले मिलते हैं। मिठाइयों का आदान प्रदान करते हैं। भांग का सेवन करते हैं। कुछ राज्यों में इस दिन उन लोगों के घर जाते हैं जहां गमी हो गई है। उन सदस्यों पर होली का रंग प्रतिकात्म रूप से डालकर कुछ देर वहां बैठा जाता है। कहते हैं कि किसी के मरने के बाद कोई सा भी पहला त्योहार नहीं मनाते हैं।

रंग पंचमी का रंग : देशभर में होलिका दहन के ठीक पांचवें दिन रंग पंचमी मनाई जाती है। इस दिन प्रत्येक व्यक्ति रंगों से सराबोर हो जाता है। शाम को स्नान आदि से निवृत्त होने के बाद एक दूसरे के घर जाकर खानपान का आनंद लिया जाता है ।

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