Haridwar Kumbh Mela 2021: जोर शोर से शुरु हुई पंचायती अखाड़ा श्री निरंजनी की पेशवाई की तैयारी,जाने कब निकलेगी पेशवाई

 

धर्म डेस्क/कुंभ मेला हरिद्वार/पंचायती अखाड़ा श्री निरंजनी की पेशवाई 2021: हरिद्वार महाकुंभ की तैयारी जैसे-जैसे आगे बढ़ रही हैं वैसे-वैसे अखाड़ों की पेशवाई की तैयारियां भी जोर पकड़ रही है।कोविड-19 के प्रोटोकाल को ध्यान में रखते हुए तीन मार्च को पंचायती अखाड़ा श्री निरंजनी की पेशवाई निकाली जाएगी।जिसकी तैयारियां अखाड़ा प्रबंधन ने शुरु कर दी हैं। जिसमें 50 महामंडलेश्वर और हजारों की संख्या में संत शामिल होंगे।

पेशवाई में होगी गुलाब के फूलों की बारिश

पंचायती अखाड़ा श्री निरंजनी की पेशवाई  में हेलीकॉप्टर से पांच क्विंटल गुलाब के फूलों की बारिश की जाएगी।जिसके लिए मंगलौरदिल्लीबिजनौर और नजीबाबाद से 10 क्विंटल गुलाब के फूल मंगवाएं जा रहे हैं। इतना ही नहीं दो ड्रोन पेशवाई की पल-पल की रिकार्डिंग भी करेंगे।

पेशवाई में बजेंगे बैंड बाजे

पंचायती अखाड़ा श्री निरंजनी के सचिव एवं मां मनसा देवी ट्रस्ट के अध्यक्ष रविंद्र पुरी के अनुसार 3 मार्च को SMJN PG COLLAGE के मैदान से सुबह 11 बजे बैंड बाजों के साथ पेशवाई निकलेगी।जो कि कॉलेज के मैदान से शुरू होकर शंकर आश्रमसिंहद्वारदेशरक्षक तिराहाकनखल चौकशंकराचार्य चौकशिवमूर्ति चौकवाल्मीकि चौकगुजरावाला भवनभाटिया भवन होकर शाम छह बजे निरंजनी अखाड़ा पहुंचेगी।

पेशवाई में होंगे 50 महामंडलेश्वर शामिल

पंचायती अखाड़ा श्री निरंजनी की पेशवाई में 50 महामंडलेश्वर शामिल होंगे। पेशवाई में हजारों नागा मौजूद रहेंगे। सबसे आगे भगवान कार्तिकेय का रथ चलेगा। इसके बाद आचार्य महामंडलेश्वर कैलाशनंद गिरि जी महाराज का रथ होगा।

पेशावाई में शामिल होंगे ऊँटहाथीघोड़े

पेशवाई में रामपुर के छह हाथीदो ऊंट और मंगलौर के 50 घोड़े शामिल होंगे। पेशवाई के लिए प्रयागराज से चांदी के सिंहासन और अहोदे सहित अन्य सामान निरंजनी अखाड़ा पहुंच गया है।

चांदी के सिंहासन पर बैठेंगे महामंडलेश्वर

पेशवाई में महामंडलेश्वर चांदी के सिंहासन पर सवार होंगे। सिंहासन राजशाही ठाट-बाट का प्रतीक होता है। महामंडलेश्वर अखाड़ा के राजा के रूप होते हैं। उन्हें सिंहासन पर बैठाकर शोभायात्रा निकाली जाती है।

वहीं हरिद्वार कुंभ में अखाड़े की छावनी के सभी तंबू भगवा और पीले रंग में रंगे के होंगे। जिससे की छावनी की भव्यता का पता चल सके। आपको बता दें कि एक अखाड़े की पहले 52 अणियां होती थींजो विलुप्त होते हुए अब केवल 18 ही बची हैं। अखाड़े के लाखों नागा संन्यासी होते हैंजिन्हें अणि नियंत्रित करती हैं।इस प्रकार से सदियों से चली आ रही परंपरा का निर्वहन संत भगवंत लगातार करते आ रहे हैं।

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