Parshuram Jayanti 2021 : जाने अक्षय तृतीया और परशुराम जयंती की तारीख और क्या है शुभ मुहूर्त,महत्व

 

Dharm/tbc/Parshuram Jayanti 2021 : हमारा देश भारत परंपराओं और त्योहारों का देश है। सनातन संस्कृति और सभ्यता का प्रतीक हैं हमारे पर्व,त्योहार।सनातन धर्म में ऐसा ही एक पवित्र त्योहार है परशुराम जयंती। जो कि हिन्दू कैलेंडर के अनुसार बैशाख माह के शुक्ल पक्ष के तीसरे दिन यानी तृतीया तिथि को मनाया जाता है। परशुराम जयंती पूरे भारत में बड़े धूमधाम के साथ मनाया जाता है साथ ही इसी दिन अक्षय तृतीया का प्रसिद्ध त्योहार भी मनाया जाता है। परशुराम जयंती के दिन उपवास के साथ-साथ सर्व ब्राह्मण का जुलुस और सत्संग आदि का आयोजन किया जाता है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन किए गए पुण्य का प्रभाव कभी समाप्त नहीं होता है। परंपरा के अनुसार इस दिन भगवान परशुराम जी की शोभायात्रा निकाली जाती है। तथा जगह-जगह पूजा-अर्चना का आयोजन किया जाता है। आपको बता दें कि भगवान परशुराम ऋषि जमदग्नि और रेणुका के पुत्र थे।

ऐसे में आईए जानते हैं कि साल 2021 में परशुराम जयंती कब है और तृतीया तिथि कब शुरु और समाप्त हो रही है साथ ही और भी भगवान परशुराम के बारे में सुंदर जानकारी जिसे जानना आपके लिए आवश्यक है।

दरअसल भगवान परशुराम का जन्म अक्षय तृतीया के दिन हुआ था अतः उनकी शस्त्रशक्ति भी अक्षय है। भगवान शिव के दिव्य धनुष की प्रत्यंचा पर केवल परशुराम जी ही बाण चढ़ा सकते थेयह उनकी अक्षय शक्ति का ही परिचय है। इन्हें भगवान श्रीहरि विष्णु का छठा अवतार कहा जाता है।

परशुराम जयंती 2021 शुभ मुहूर्त

परशुराम जयंती - 14 मई 2021, दिन शुक्रवार को मनाई जाएगी।

तृतीया तिथि प्रारंभ 14 मई 2021 सुबह 05 बजकर 40 मिनट पर

तृतीया तिथि की समाप्ति 15 मई 2021 सुबह 08 बजे

भगवान परशुराम के गायत्री मंत्र :

ॐ ब्रह्मक्षत्राय विद्महे क्षत्रियान्ताय धीमहि तन्नो राम: प्रचोदयात् ॥

ॐ जामदग्न्याय विद्महे महावीराय धीमहि तन्नो परशुराम: प्रचोदयात् ॥

ॐ रां रां ॐ रां रां परशुहस्ताय नम: ॥

इन मंत्रों का जाप विधि विधान से आज के दिन करना चाहिए।

जानिए भगवान परशुरामके प्रसिद्ध मंदिर:

भगवान परशुराम मंदिरत्र्यम्बकेश्वरनासिकमहाराष्ट्र

 परशुराम मंदिरअट्टिरालाजिला कुड्डापह ,आंध्रा प्रदेश

परशुराम मंदिरसोहनागसलेमपुरउत्तर प्रदेश

अखनूरजम्मू और कश्मीर

कुंभलगढ़राजस्थान

महुगढ़महाराष्ट्र

परशुराम मंदिरपीतमबराकुल्लूहिमाचल प्रदेश.

जनपव हिलइंदौर मध्य प्रदेश

 परशुराम कुंड लोहित जिलाअरुणाचल प्रदेश

- एसी मान्यता हैकि लोहित कुंड में अपनी माता का वध करने के बाद परशुराम ने यहाँ स्नान कर अपने पाप का प्रायश्चित किया था ।

परशुराम जयंती के दिन सूर्योदय से पहले पवित्र नदी में स्नान करना शुभ माना जाता है। स्नान करने के बाद भक्त ताजे और साफ-सुथरे पूजा के वस्त्र धारण करते हैं। इस दिन भक्त भगवान विष्णु को चंदनतुलसी के पत्तेकुमकुमअगरबत्तीफूल और मिठाई अर्पित करके पूजा करते हैं। परशुराम जयंती के दिन उपवास रखना अत्यधिक महत्वपूर्ण माना जाता है। क्योंकि ऐसा माना जाता है कि इस दिन उपवास करने से भक्तों को पुत्र की प्राप्ति होती है। जो श्रद्धालु उपवास करते हैं वे दाल या अनाज का सेवन इस दिन नहीं करते हैं।

।।आप सभी को भगवान परशुराम की जयंती की हार्दिक शुभकामनाएं व बधाई।।

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