मोहिनी एकादशी 2021: जानिए कब है मोहिनी एकादशी,क्या है शुभ मुहूर्त, मंत्र, महत्व और पूजन विधि

 

Dharm Desk/tbc- सनातन धर्म में एकादशी का बड़ा विशेष महत्व शास्त्रों में बताया गया है।खासकर वैशाख माह में पड़ने वाली मोहिनी एकादशी का । यह एकादशी वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को आती है। मोहिनी एकादशी पर भगवान श्रीहरि विष्णु की आराधना करने से जहां सुख-समृद्धि बढ़ती है वहीं शाश्वत शांति भी प्राप्त होती है। धर्म शास्त्रों में ऐसा कहा गय है कि इस दिन व्रत-उपवास रखकर मोह-माया के बंधन से मु‍क्त होने के लिए यह एकादशी बहुत लाभदायी है।

ऐसा माना जाता है कि इस दिन व्रत करने से अनेकानेक मनचाही कामनाएं पूरी हो जाती है। कहा जाता है कि भगवान श्रीरामचंद्र जी ने भी इस व्रत को किया था और भगवान श्रीकृष्ण के कहने पर युधिष्ठिर ने भी इस व्रत को किया था।

इसीलिए कहा जाता है कि मोहिनी एकादशी व्रत से मोह आदि सब नष्ट हो जाते हैं। संसार में इस व्रत से श्रेष्ठ कोई व्रत नहीं है। इसके माहात्म्य को पढ़ने से अथवा सुनने से एक हजार गौदान का फल प्राप्त होता है।

मोहिनी एकादशी के शुभ मुहूर्त-

मोहिनी एकादशी तिथि प्रारंभ- 22 मई 2021, शनिवारप्रात: 9 बजकर 15 मिनट से

मोहिनी एकादशी तिथी समाप्त- 23 मई 2021रविवार-प्रात: 6 बजकर 45 मिनट तक

एकादशी का पारण – 24 मई 2021, सोमवार

एकादशी के दिन इनमें से किसी भरी मंत्र का 108 बार जाप अवश्‍य करना चाहिए।

विशेष मंत्र -

ॐ विष्णवे नम:

ॐ नमो भगवते वासुदेवाय।

श्रीकृष्ण गोविन्द हरे मुरारे। हे नाथ नारायण वासुदेवाय।।

ॐ नारायणाय विद्महे। वासुदेवाय धीमहि। तन्नो विष्णु प्रचोदयात्।।

ॐ नमो नारायण। श्री मन नारायण नारायण हरि हरि।

मोहिनी एकादशी व्रत के नियम व सावधानी

-एका‍दशी के दिन चावल खाना वर्जित हैं।

-यह एकादशी व्रत समस्त पापों का क्षय करता है तथा व्यक्ति के आकर्षण प्रभाव में वृद्धि करता है।

-इस व्रत को करने से मनुष्य को समाजपरिवार तथा देश में प्रतिष्ठा मिलती है तथा उसकी ख्याति चारों ओर फैलती है।

-यह व्रत सभी मोह बंधनों से मुक्त करने वाला है और समस्त पापों का नाश करने वाला है।

-एकादशी व्रत के प्रभाव से मनुष्य को मृत्यु के बाद मिलने वाली नर्क की यातनाओं से छुटकारा मिलता है।

-विष्णु पुराण के अनुसार मोहिनी एकादशी का विधिवत व्रत करने से मनुष्य मोह-माया के बंधनों से मुक्त हो जाता है। साथ ही व्रती के समस्त पापों का नाश हो जाता है।

-मोहिनी एकादशी के अवसर पर श्रद्धालुओं को सुबह से ही पूजा-पाठप्रातःकालीन आरतीसत्संगएकादशी महात्म्य की कथाप्रवचन सुनना चाहिए।

- मोहिनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु को चंदन और जौ चढ़ाने चाहिए क्योंकि यह व्रत परम सात्विकता और आचरण की शुद्धि का व्रत होता है। अत: हमें अपने जीवन काल में धर्मानुकूल आचरण करते हुए मोक्ष प्राप्ति का मार्ग ढूंढना चाहिए।

मोहिनी एकादशी महात्म्य

स्कंद पुराण के अनुसार मोहिनी एकादशी के दिन समुद्र मंथन में निकले अमृत का बंटवारा हुआ था। स्कंद पुराण के अवंतिका खंड में शिप्रा को अमृतदायिनीपुण्यदायिनी कहा गया। अत: मोहिनी एकादशी पर शिप्रा में अमृत महोत्सव का आयोजन किया जाता है। इसलिए कहते हैं - तत सोमवती शिप्रा विख्याता यति पुण्यदा पवित्राय...।

अवंतिका खंड के अनुसार मोहिनी रूपधारी भगवान विष्णु ने अवंतिका नगरी में अमृत वितरण किया था। देवासुर संग्राम के दौरान मोहिनी रूप रखकर राक्षकों को चकमा दिया और देवताओं को अमृत पान करवाया। यह दिन देवासुर संग्राम का समापन दिन भी माना जाता है।

।।आप सभी को मोहिनी एकादशी की हार्दिक शुभकामनाएं व बधाई।।

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