कितना जानते हैं आप शनिदेव के बारे में,शनिदेव को समझ लिया तो मिल जाएगा समाधान।

 

ऊँ शं शनैश्चराय नमः।

ऊँ नीलांजनसमाभासं रविपुत्रं यमाग्रजम्‌।

छायामार्तण्डसम्भूतं तं नमामि शनैश्चरम्‌।

Dharm Desk/tbc: शनिदेव की महत्ता को कौन नहीं जानता। शनि की कृपा जिसपर हो जाए उसकी नैया पार समझो और जिसपर हो जाएं शनिदेव नाराज समझ लें उसकी नैया डूबने से कोई रोक नहीं सकता । लेकिन एक बात तो जान ले कि शनिदेव से डरना नहीं है बल्कि उन्हें समझने में ही सभी समस्याओं का समाधान है।

आपको बता दें कि शनिदेव न्याय के देवता हैं वे दण्डाधिकारी और कलियुग के न्यायाधीश है। जिसका जैसा कर्म उसको वैसा ही फल देते हैं शनिदेव । ऐसी मान्यता है कि कुंडली में सूर्य है राजाबुध है मंत्रीमंगल है सेनापतिशनि है न्यायाधीशराहु-केतु है प्रशासकगुरु है अच्छे मार्ग का प्रदर्शकचंद्र है माता और मन का प्रदर्शकशुक्र है- पति के लिए पत्नी और पत्नी के लिए पति तथा वीर्य बल।

दरअसल जब समाज में कोई व्यक्ति अपराध करता है तो शनि के आदेश पर राहु और केतु उसे दंड देने के लिए सक्रिय हो जाते हैं। शनि की कोर्ट में दंड पहले दिया जाता हैबाद में मुकदमा इस बात के लिए चलता है कि आगे यदि इस व्यक्ति के चाल-चलन ठीक रहे तो दंड की अवधि बीतने के बाद इसे फिर से खुशहाल कर दिया जाए या नहीं।

ज्योतिषशास्त्र के अनुसार शनि ग्रह मकर और कुम्भ राशी के स्वामी है। तुला में उच्च का और मेष में नीच का माना गया है। ग्यारहवां भाव पक्का घर। दसवें और अष्टम पर भी आधिपत्य। इनका प्रभाव गिद्धभैंसाकौवादिशा वायवतेललोहाफौलादपोशाक जुराबजूतावृक्ष कीकरआक और खजूर का वृक्ष पर रहता है।

शरीर के अंगों में दृष्टिबालभवेंकनपटीपेशा लुहारतरखान और मोचीसिफत: मूर्खअक्खड़कारिगरगुण देखनाभालनाचालाकीमौत और बीमारीशक्ति जादूमंत्र देखने दिखाने की शक्ति पर असर देता है। शनि ग्रह का भ्रमण काल एक राशि में ढ़ाई वर्ष रहता है। बुधशुक्र और राहु के मित्रसूर्यचंद्र और मंगल के शत्रु और बृहस्पति एवं केतु के साथ समभाव से रहते हैं। मंगल के साथ हो तो सर्वाधिक बलशाली। नक्षत्र पुष्यअनुराधा और उत्तराभाद्रपद है।

आपको बता दें कि शनि से ही हमारा कर्म जीवन चलता है। दशम भाव को कर्मपिता तथा राज्य का भाव माना गया है। एकादश भाव को आय का भाव माना गया है। अतः कर्मसत्ता तथा आय का प्रतिनिधि ग्रह होने के कारण कुंडली में शनि का स्थान महत्वपूर्ण माना गया है।इसलिए शनि से बचने का एक मात्र उपाय अपने कर्म को शुद्ध रखना है।

जाने शनिदेव को क्या पसंद नहीं है

शनिदेव को जुआ-सट्टा खेलनाशराब पीनाब्याजखोरी करनापरस्त्री गमन करनाझूठी गवाही देनानिर्दोष लोगों को सतानाकिसी के पीठ पीछे उसके खिलाफ कोई कार्य करनाचाचा-चाचीमाता-पितासेवकों और गुरु का अपमान करनाईश्वर के खिलाफ होनादांतों को गंदा रखनातहखाने की कैद हवा को मुक्त करनाभैंस या भैसों को मारनासांपकुत्ते और कौवों को सताना। सफाईकर्मी और अपंगों का अपमान आदि करना पसंद नहीं है। अपने आचरण और व्यवहार को हम सही रखें तो शनिदेव से डरने की कोई जरूरत नहीं।

जाने शनिदेव के प्रकोप से बचने के उपाय

1. प्रतिदिन हनुमान चालीसा पढ़े।

2. भगवान भैरव को कच्चा दूध या शराब चढ़ाएं।

3. छाया दान करें।

4. कौवे को प्रतिदिन रोटी खिलावें।

5. अंधे-अपंगोंसेवकों और सफाईकर्मियों की सेवा करें।

6. तिलउड़दभैंसलोहातेलकाला वस्त्रकाली गौऔर जूता दान देना चाहिए।

 इस प्रकार से नित्य शनिदेव की पूजा आराधना करें और मनसा वाचा कर्मणा नेक कार्य करें जीवन में शनिदेव की कृपा सदैव बनी रहेगी।जय शनिदेव।।

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