Radha Ashtami 20 21: जाने कब है राधा अष्टमी, क्या है व्रत विधि,महत्व और पूजा का शुभ मुहूर्त

 

Dharm Desk/tbc/Radha Ashtami 2021 Date: श्रीराधा नाम की महिमा अपरंपार है। श्री कृष्ण स्वयं कहते हैं- जिस समय मैं किसी के मुख से रा सुनता हूंउसे मैं अपना भक्ति प्रेम प्रदान करता हूं और धा शब्द के उच्चारण करनें पर तो मैं राधा नाम सुनने के लोभ से उसके पीछे चल देता हूं।

जहां कृष्ण राधा तहां जहं राधा तहं कृष्ण।

न्यारे निमिष न होत कहु समुझि करहु यह प्रश्न।।

जब-जब श्री कृष्ण का नाम लिया जाता हैतब तब राधा का नाम अपने आप ही लिया जाता है। ये दो नाम एक साथ हमेशा के लिए साथ जुड़ गए हैं। हिन्दू पंचांग के अनुसार राधा अष्टमी का व्रत भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को अर्थात जन्माष्टमी व्रत के 15 दिन बाद पड़ती है। इस साल राधा अष्टमी 14 सितंबरमंगलवार को मनाई जाएगी। इस दिन राधा अष्टमी का व्रत रखकर राधा और भगवान श्री कृष्ण की पूजा की जाती है। मान्यता है कि राधा अष्टमी व्रत के बिना जन्माष्टमी का व्रत अधूरा माना जाता है।  इस लिए राधा अष्टमी के व्रत का महत्व और अधिक बढ़ जाता है। ऐसा माना जाता है कि राधा रानी के बिना श्री कृष्ण की पूजा अधूरी रह जाती है। इसलिए जब-जब भगवान श्री कृष्ण का नाम लिया जाता हैतब तब राधा रानी का नाम साथ में लिया जाता है। कृष्ण जन्माष्टमी की तरह राधा अष्टमी भी मथुरावृंदावन और बरसाने में बड़ी धूम-धाम से मनाई जाती है।

राधा अष्टमी शुभ मुहूर्त

राधा जन्माष्टमी 2021- 14 सितंबर 2021, मंगलवार

अष्टमी तिथि प्रारंभ: 13 सितंबर 2021 दोपहर 03:10 बजे

अष्टमी तिथि समाप्त: 14 सितंबर 2021 दोपहर 01:09 बजे

जाने राधा अष्टमी व्रत की पूजा विधि -

-प्रातःकाल स्नानादि से निवृत्त हो जाएं।

-इसके बाद मंडप के नीचे मंडल बनाकर उसके मध्यभाग में मिट्टी या तांबे का कलश स्थापित करें।

-कलश पर तांबे का पात्र रखें।

अब इस पात्र पर वस्त्राभूषण से सुसज्जित राधाजी की सोने (संभव हो तो) की मूर्ति स्थापित करें।

-तत्पश्चात राधाजी का षोडशोपचार से पूजन करें।

ध्यान रहे कि पूजा का समय ठीक मध्याह्न का होना चाहिए।

-पूजन पश्चात पूरा उपवास करें अथवा एक समय भोजन करें।

दूसरे दिन श्रद्धानुसार सुहागिन स्त्रियों तथा ब्राह्मणों को भोजन कराएं व उन्हें दक्षिणा दें।

राधा अष्टमी महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसारबिना राधा अष्टमी की पूजा के जन्माष्टमी व्रत अधूरा रहता है। ऐसे में यह व्रत अति महत्वपूर्ण हो जाता है। कहा जाता है कि राधा अष्टमी का व्रत करने से सभी पापों का नाश होता है। सुहागिन महिलाएं इस दिन व्रत रखकर राधा जी की पूजा करती हैं।

इससे उन्हें संतान सुख और अखंड सौभाग्य की प्राप्ति  होती है. कहा जाता है कि राधा अष्टमी व्रत करने से घर में मां लक्ष्मी आती हैं और सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं.पौराणिक कथाओं में यह भी कहा गया है कि  जिन लोगों पर राधा जी को प्रसन्न हो जाती है। उनपर भगवान श्रीकृष्ण अपने आप प्रसन्न हो जाते हैं।

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