Shardiya Navratri 2021 Durga Maha Ashtami Puja: कब है दुर्गा महा अष्टमी पूजा,जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व

 

धर्म डेस्क/शारदीय नवरात्रि 2021/ संधि पूजा/ दुर्गा महा अष्टमी पूजा: जय माता दी। शक्ति की उपासना का महापर्व शारदीय नवरात्रि।इस विशेष महापर्व पर आद्य शक्ति माँ भगवती के नव रुपों की विधि विधान के साथ पूजा अर्चना की जाती है विशेष तौर पर दुर्गा अष्टमी का बड़ा विशेष महत्व बताया गया है।ऐसे में चलिए जानते हैं कि कब है दुर्गा अष्टमी,क्या है इसका महत्व और क्या शुभ तिथि और मुहूर्त-

आपको बता दें कि महाष्टमी का दुर्गा पूजा में विशेष महत्व बताया गया है । इसे महा दुर्गाष्टमी भी कहा जाता है। महाष्टमी पर देवी दुर्गा की पूजा करने का अनुष्ठान महासप्तमी की तरह ही होता है। हालांकि इस दिन प्राण प्रतिष्ठा नहीं की जाती है। महाष्टमी के दिन महास्नान के बाद मां दुर्गा का षोडशोपचार पूजन करने की वैदिक परंपरा है ।

पूजा विधान की बात करें तो महाष्टमी के दिननौ मिट्टी के कलश रखे जाते हैं और देवी दुर्गा के नौ रूपों का ध्यान और आह्वान किया जाता है। इस विशेष अवसर पर देवी दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाती है।

दुर्गा महा अष्टमी पूजा कब है ?

दुर्गा महा अष्टमी 2021 पूजा

बुधवार, 13 अक्टूबर, 2021

अक्टूबर 12, 2021 को 21:49:38 से अष्टमी आरम्भ

अक्टूबर 13, 2021 को 20:09:56 पर अष्टमी समाप्त

कुमारी पूजा का महत्व

दुर्गा अष्टमी यानी महाष्टमी के दिन कुमारी पूजा भी करने का विधान है। इस विशेष अवसर पर अविवाहित लड़की या छोटी बच्ची को देवी दुर्गा की तरह श्रृंगार कर उनकी भाव सहित पूजा,आराधना की जाती है। कुमारी पूजा भारत के कई राज्यों में नवरात्रि के नौ दिनों में की जाती है। कुमारी पूजा को कन्या पूजनकुमारिका पूजा के रुप में भी जनसामान्य जानता है ।

सनातनी परंपरा की बात करें तो 2 से 10 वर्ष की आयु की कन्या कुमारी पूजा के लिए उपयुक्त मानी जाती हैं । कुमारी पूजा में ये बालिकाएं देवी दुर्गा के विभिन्न रूपों को दर्शाती हैं-

कुमारिका,त्रिमूर्ति,कल्याणी,रोहिणी,काली,चंडिका,शनभावी,दुर्गा,भद्रा या सुभद्रा,संधि पूजा

जाने क्या है संधि पूजा

विद्वतजनो एवं धर्म ग्रंथों के अनुसार महाअष्टमी को दुर्गा पूजा का बड़ा विशेष दिन होता है । संधि पूजा महाष्टमी पर की जाती है। यह पूजा अष्टमी और नवमी दोनों दिन चलती है। संधि पूजा में अष्टमी समाप्त होने के अंतिम 24 मिनट और नवमी प्रारंभ होने के शुरुआती 24 मिनट के समय को संधि क्षण या काल कहते हैं। संधि काल का समय दुर्गा पूजा के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है। क्योंकि यह वह समय है जब अष्टमी तिथि समाप्त होती है और नवमी तिथि शुरू होती है।देवी भागवत के अनुसार यही वो समय है जब आद्य शक्ति माँ भगवती प्रकट हुईं और असुर चंड, मुंड का वध किया था।

संधि पूजा के समय देवी दुर्गा को पशु बलि देने की प्रथा है। हालांकिपशु बलि देने के बजायमां के भक्त एक प्रतीक के रूप में केलाकद्दू और ककड़ी जैसे फल और सब्जी की बलि चढ़ाते हैं। पश्चिम बंगाल के वेल्लोर मठ में संध्या पूजा के समय प्रतीक के रूप में केले की बलि दी जाती है। साथ ही संधि पूजा में 107 दीये, 108 कमल, 108 बेल के पत्तेगहनेपारंपरिक कपड़ेगुडहल के फूलचावल अनाज (बिना पके) और एक लाल फल व माला का उपयोग कर मां दुर्गा का श्रृंगार किया जाता है। इसके बाद मां दुर्गा के मंत्रों का जाप करके उनकी आरती की जाती है। इस दौरान संधि पूजा का शुभारंग घंटी बजाकर किया जाता है।जय माता दी।

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