Shardiya Navratri 2021 Sandhi Puja : जाने कब है संधि पूजा ? क्यों दी जाती है सब्जी बलि,क्या है शुभ मुहूर्त, महत्व,पूजा विधि और कथा

 

धर्म डेस्क/शारदीय नवरात्रि 2021/ संधि पूजा: आद्य शक्ति माँ भगवती की आराधना के महापर्व नवरात्रि के दौरान संधि पूजा का पौराणिक महत्व है। संधि पूजा का अष्टमी और नवमी को बहुत महत्व रखता है। प्राचीन काल से चली आ रही इस पंरपरा को आज भी उतनी ही श्रद्धा और भक्ति के साथ देवी के भक्त निभाते हैं। इस दिन देवी को सब्जियों की बलि देनी चाहिए। मान्यता है कि सब्जियों की बलि से देवी की कृपा संपूर्ण परिवार पर बनी रहती है। संधि पूजा अष्टमी के खत्म होने और नवमी के लगने के बाद के काल तक की जाती है। इस दिन पारंपरिक वस्त्रों में और पारंपरिक विधि से देवी की पूजा का विधान होता है। तो आइए जानेंसंधि पूजा का शुभ मुहूर्तमहत्वपूजा की विधि और कथा के बारे में।

संधि पूजा शुभ मुहूर्त

शारदीय नवरात्रि सन्धि पूजा

सन्धि पूजा बुधवारअक्टूबर 132021 को

सन्धि पूजा मुहूर्त - 07:43 पी एम से 08:31 पी एम

अष्टमी तिथि प्रारम्भ - अक्टूबर 122021 को 09:47 पी.एम बजे

अष्टमी तिथि समाप्त - अक्टूबर 132021 को 08:07 पी.एम बजे

संधि पूजा का महत्व

 शारदीय नवरात्रि में संधि पूजा अष्टमी और नवमी तिथि पर शाम के समय होती है दो तिथि के मिलन के कारण इसे संधि पूजा के नाम से जाना जाता है। संधि पूजा को अष्टमी तिथि के आखिरी 24 मिनट और नवमी तिथि शुरू होने के 24 मिनट  बाद तक किया जाता है। पौराणिक कथा के अनुसार जिस समय मां चामुण्डा और महिषासुर के बीच में भयंकर युद्ध हो रहा था। उस समय चण्ड और मुंड नाम के दो राक्षसों ने माता चामुण्डा की पीठ पर वार कर दिया थाइसके बाद माता का मुख क्रोध के कारण नीला पड़ गया और माता ने दोनों राक्षस का वध कर दिया था। जिस समय उनका वध हुआ संधि काल का ही था। इस मुहूर्त को बहुत ही शक्तिशाली माना गया है।

 

संधि पूजा की विधि-विधान

शुभ समय संधि पूजा शुरू करनी चाहिए और  देवी दुर्गा को 108 दीपक और 108 कमल के फूल चढ़ाने चाहिए। साथ ही 108 बेलपत्र भी चढ़ाएं। इसके बाद मां दुर्गा को लाल वस्त्र,  लाल फल,  पुष्पचावल और मेवा अर्पित करें और गहने आदि पहना कर उनका पूरा श्रृंगार करें। धूप-दीप के साथ देवी मंत्र के जाप के बाद आरती करें। पंडालों में ढोल-नगाड़ों के साथ संधि पूजा का शुभारंग घंटी बजाकर किया जाता है।

 

संधि पूजा पर दी जाती है सब्जी बलि

इस दिन मां दुर्गा कई जगह पशु बलि दी जाती हैंलेकिन इस दिन सब्जियों की बलि का खास महत्व होता है। खास कर इस दिन कददू और ककड़ी की बलि देना बहुत शुभकर माना गया है।

संधि पूजा की पौराणिक कथा

पौराणिक कथाओं के अनुसार जब देवीमहिषासुर के साथ युद्ध कर रही थीं तब चंड और मुंड ने देवी पर पीछे से वार कर दिया इससे देवी का क्रोध ताप बढ़ गया और उनकी शक्ति भी। क्रोध के कारण उनका पूरा शरीर नीला पड़ गया। इसके बाद मां दुर्गा ने तीसरी आंख खोली और मां दुर्गा का स्वरूप चामुंडा देवी में बदल गया। इसके बाद मां ने चंड और मुंड का वध कर दिया। मां दुर्गा के चामुंडा रूप लेने के सम्मान में ही संधि पूजा की जाती है। संधि पूजा को बंगाल में विशेष रूप से मनाया जाता है। इस दिन लोग पारंपरिक वेश भूषा धारण करते हैं। इस दिन मां दुर्गा को 108 दीपक, 108 कमल, 108 बेल के पत्तेगहनेपारंपरिक कपड़ेहिबिस्कस फूलचावल अनाजएक लाल फल और माला अर्पित की जाती है। संधि पूजा में मंत्रोच्चारण को भी विशेष महत्व दिया जाता है। इस दिन मां की पूजा ढोलनगाड़ों के साथ की जाती है।

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