Sanjha-Sanjhi Festival Date 2021 : जाने कब है लोक पर्व सांझा-सांझी का त्यौहार,क्या है विधि और परंपरा

 

धर्म समाचार/सांझा- सांझी त्यौहार 2021 :- तीज त्योहारों का देश है भारत।जो हमें एक दूसरे से जोड़ती है और हमारी संस्कृति और सभ्यता को संबृद्ध करती है। साँझा-साँझी ऐसा ही एक महत्वपूर्ण त्योहार है जो हमारे देश के अनेक हिस्सों में बड़े धूमधाम से मनाया जाता है। सांझा- सांझी का पर्व एक लोक पर्व है। साँझी का त्योहार आश्विन मास के प्रारंभ होते ही पूर्णमासी से अमावस्या तक मनाया जाता है। खासकर यह त्योहार मुख्य रूप से राजस्थानहरियाणाउत्तरप्रदेशपंजाब और गुजरात में मनाया जाता है।जिसमें गाय के गोबर और फूलों से बनी सांझी तैयार करने की परंपरा है जिसे वैष्णव मंदिरों द्वारा 15वी व 16वीं शताब्दी में किया गया थाजो निरंतर अभी भी गांवों में खूब प्रचलित है। मालवा निमाड़ की लोक संस्कृति में यह पर्व श्राद्ध पक्ष के 16 दिनों में सांझा पर्व’ के रूप में मनाया जाता है ।

वहीं हरियाणा, पंजाब और हिमाचल समेत कई क्षेत्रों में यह पर्व शारदीय नवरात्र में मनाया जाता है। जिसमें कुंवारी कन्याओं के द्वारा सांझी माता यानी संध्या की पूजा की जाती है। नवरात्रि की नौ दिनों तक यह पूजा  की जाती है माना जाता है कि राधा रानी शाम को दीवाल पर एक आकृति बनाकर पूजा किया करती थी जिन्हें बाद में संध्या माता या सांझी माता के पूजन रूप में मनाया जाने लगा।

आपको बता दें कि साँझी एक देवी का नाम हैजिसे महिलाएँ घर की दीवार पर गाय के गोबर व मिट्टी से बनाया जाता है। साँझी की मिट्टी की एक प्रतिमा बनाई जाती है जिसमें अलग-अगल रंगहारचूङियांफूल पत्तोंमालीपन्ना सिन्दूर व रंग बिरंगे कपड़ों से सजाया जाता है।

चलिए जानते हैं तिथियों के हिसाब से देश के किस क्षेत्र में कब मनाया जाता है ये त्योहार-

मालवा-निमाड़ की लोक सांस्कृतिक त्यौहार सांझा पर्व की तिथि 2021 :- भाद्रपद की पूर्णिमा अमावस्या तक सांझा पर्व मध्य प्रदेश मालवा क्षेत्र में मनाया जाता है। सांझा पर्व 20 अक्टूबर 2021 दिन सोमवार  से शुरू होगा व 6 अक्टूबर 2021 दिन बुधवार को समाप्त होगा।

पंजाब हरियाणा हिमाचल प्रदेश के क्षेत्रों में सांझी माता पर्व की तिथि :- आश्विन मास की शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से नवमी तक यह त्यौहार बड़े धूमधाम से कुंवारी कन्याएं मनाती हैं। सांझी माता पर्व 7 अक्टूबर 2021 दिन गुरुवार से शुरू होगा व 15 अक्टूबर 2021 दिन शुक्रवार को समाप्त होगा।

सांझा- सांझी पूजन विधि :-

सांझी माता को गोबर से दीवार पर बनाया जाता है उसमें विभिन्न प्रकार की आकृतियां जैसे चांद तारा आदि बनाए जाते हैं। माता के हाथ पैर मुखौटे को सजाया जाता है। विभिन्न प्रकार के रंगों से माता को रंगा जाता है माता का श्रंगार किया जाता है। घरों के बाहर दीवाल पर कुंवारी कन्याएं सांझ आसान जी माता की तस्वीर बनाती हैं वह पूरे दिनों तक  उनकी पूजा-अर्चना करती हैं और शाम के वक्त सांझी गीत गाया जाता है। विजयदशमी के दिन जिस दिन दुर्गा मूर्ति विसर्जन होता है। उसी दिन सांझी माता की मूर्ति को भी लोग गांव के आसपास में बने तालाबों में विसर्जित कर देते हैं।

इस प्रकार से लोक संस्कृति के बारे में जरुर जाने और इसका हिस्सा भी बनें।क्योंकि हमारी संस्कृति और हमारी विरासत ही हमारी पहचान हैं जिसपर हमें गर्व होना चाहिए।

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