Durga Maha Navami Puja 2021 Navratri 2021: नवमी की तिथि कब है? जानें कन्या पूजन विधि और पूजा का शुभ मुहूर्त

 

Dharm Desk/tbc/Sharadia Navratri 2021: पंचांग के अनुसार शारदीय नवरात्रि की नवमी तिथि 13 अक्टूबर से आरंभ होगी। इस दिन कन्या पूजन का विशेष महत्व बताया गया है। महानवमी दुर्गा पूजा का तीसरा और आखिरी दिन है। इस दिन की शुरुआत महास्नान और षोडशोपचार पूजा से होती है। महानवमी पर देवी दुर्गा को महिषासुर मर्दिनी के रूप में पूजा जाता है। इसका अर्थ है कि असुर महिषासुर का संहार करने वाली। माना जाता है कि इसी दिन मां दुर्गा ने महिषासुर का संहार किया था। इस दिन महानवमी पूजानवमी हवन और दुर्गा बलिदान जैसी परंपराएं निभाई जाती हैं। नवमी तिथि को भगवान श्रीराम के जन्मदिवस के रूप में भी मनाया जाता है। नवमी की तिथि को बहुत ही शुभ माना जाता है। नवमी की तिथि शुभ कार्यों को आरंभ करने के लिए भी उत्तम मानी गई है। नवमी का तिथि का विशेष धार्मिक महत्व बताया गया है।

7 अक्टूबर से नवरात्रि का पर्व आरंभ हुआ है। नवरात्रि के पर्व में मां दुर्गा के 9 स्वरूपों की पूजा की जाती है। नवरात्रि के पर्व में अष्टमी और नवमी तिथि को विशेष महत्व दिया जाता है। अष्टमी में मां महागौरी का पूजन किया जाता है। इस अष्टमी को महाअष्टमी के नाम से भी जाना जाता है। नवमी की तिथि मे मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है। इसी दिन कन्या पूजन और कन्याओं को प्रसाद का भोग लगाया जाता है। पूजन के बाद नवरात्रि व्रत का पारण किया जाता है।

2021 में दुर्गा महा नवमी पूजा कब है?

शुभ मुहूर्त

दुर्गा महा नवमी 2021 पूजा

गुरुवार, 14 अक्टूबर, 2021

अक्टूबर 13, 2021 को 20:09:56 से नवमी आरम्भ

अक्टूबर 14, 2021 को 18:54:40 पर नवमी समाप्त

13 अक्टूबर से आरंभ होगी नवमी की तिथि

जाने कन्या पूजन की विधि

अष्टमी और नवमी की तिथि में कन्या पूजन का विशेष महत्व बताया गया है। कन्या पूजन में 9 कन्याओं का पूजन किया जाता है। इसमें एक लड़के को भी आमंत्रित किया जाता है। इस लड़के को बटुक भैरव का स्वरूप माना जाता है। इसे लंगूरा भी कहा जाता है। कन्याओं और बटुक भैरव के स्वरूप के पैरों को जल से स्वच्छ करते हैं।

इसके उपरांत आसन प्रदान किया जाता है। इसके बाद सभी का तिलक करें। इसके बाद आदर भाव से सभी को भोजन कराएं। भोजन करने के बाद सभी को उपहार आदि प्रदान करें। कन्याओं के चरण स्पर्श कर प्रेमभाव से विदा करें। विदा करने से पूर्व मार्ग पर जल की छींटें दें।

कब मनाई जाती है महानवमी ?

अगर अष्टमी के दिन नवमी तिथि शुरू होती हैतो अष्टमी के दिन ही नवमी पूजा और उपवास किया जाता है।शास्त्रों के अनुसारअगर अष्टमी और नवमी तिथि अष्टमी की शाम से पहले समाप्त हो जाती हैतो ऐसी स्थिति में उसी दिन अष्टमी पूजानवमी पूजा और संधि पूजा करने का विधान है।

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