Padmanabha dwadashi 2021: जाने कब है पद्मनाभ द्वादशी ,मनोवांछित फल देने वाले इस व्रत की क्या है महिमा?

 

Dharm Desk/tbc/padmanabha dwadashi 2021: पद्मनाभ  द्वादशी आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की  द्वादशी तिथि को मनाया जाता है। इस द्वादशी को भगवान श्रीहरि विष्णु के पद्मनाभ रूप की पूजा की जाती है। भगवान श्रीहरि विष्णु की कृपा से इस व्रत को करने वाले साधकों को पूरे जीवन धन-संपदा और वैभव की कमी नहीं होती है और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

पद्मनाभ द्वादशी 

पद्मनाभ द्वादशी के दिन भगवान श्री पद्मनाभ की पूजा का विधान है। इस दिन भगवान जागृतावस्था प्राप्त करने हेतु अंगडाई लेते है तथा पद्मासीन ब्रह्या” ऊँकार“ ध्वनि करते हैं।आज के दिन साधक को एक घट स्थापित कर उसमें पद्मनाभ (विष्णु) की एक स्वर्ण प्रतिमा डालनी चाहिए। फिर चन्दन लेपपुष्पों आदि से भगवान की प्रतिमा की पूजा करें।ऐसा करने से साधक को भगवत भक्ति की प्राप्ति होती है ।

जाने साधना के विशिष्ट मंत्र और तिथि के बारे में-

मंत्र

ॐ पद्मनाभाय नम:।।

द्वादशी तिथि प्रारंभ: 16 अक्टूबर 2021 शाम 05:37 बजे

द्वादशी तिथि समाप्त: 17 अक्टूबर 2021 को शाम 05:40 बजे

क्या है पद्मनाभ द्वादशी का विशेष महत्व

आपको बता दें कि इस वर्ष पद्मनाभ द्वादशी गुरुवार को पड़ रही है। गुरुवार के दिन पद्मनाभ द्वादशी व्रत होने से इसका महत्व और प्रभाव कई गुना बढ़ जाता है। भगवान विष्णु के पद्मनाभ स्वरूप की पूजा करने से उनकी कृपा के साथ मां लक्ष्मी जी का भी आशीर्वाद साधक को प्राप्त होता हैं। इस दिन व्रत रखने से न केवल यश तथा धन की प्राप्ति होती है बल्कि जीवन में धन का कभी अभाव नहीं रहता है।सनातन धर्म में पद्मनाभ द्वादशी का बड़ा विशेष महत्व बताया गया है।

पद्मनाभ द्वादशी का महत्व

पापांकुशा एकादशी के अगले दिन पद्मनाभ द्वादशी मनायी जाती है। ऐसी मान्यता है कि पद्मनाभ द्वादशी व्रत का पालन करने वाले भक्तों को जीवन भर समृद्धि प्राप्त होती है और मोक्ष मिलता है।

पद्मनाभ द्वादशी नए कार्य प्रारंभ करने के लिए शुभ

पद्मनाभ द्वादशी को बहुत शुभ माना जाता है। इस दिन जो भी अपना बिजनेस शुरू करना चाहते हैं उनके लिए यह दिन बहुत खास होता है। पद्मनाभ द्वादशी के दिन किया जाने वाला कार्य अच्छे परिणाम देता है।

यही नहीं जो भी भक्त आध्यात्मिक ज्ञान और सांसारिक सुख चाहते हैं वे इस दिन विशेष अर्चना कर सकते हैं। इस प्रकार भगवान पद्मनाभ की अर्चना से न केवल सांसारिक सुख में वृद्धि होती है बल्कि आध्यात्मिक उन्नति का भी मार्ग प्रशस्त होता है।

जाने कैसे मनाएं पद्मनाभ द्वादशी 

द्वादशी के विशेष दिन प्रातः उठकर नित्य क्रिया,स्नानादि से निवृत होकर स्वच्छ कपड़े धारण करें और मन से व्रत का संकल्प लें। उसके बाद धूपदीपचंदन और नैवेद्य से आरती करें। साथ ही विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें। पूजा के बाद ब्राह्मणों को भोजन करा दान दें। इस बात का ध्यान रखें कि पद्मनाभ द्वादशी के दिन शेषनाग पर बैठे भगवान की पूजा करें।

इसके अलावा धूपदीपनैवेद्य के साथ ही भगवान को गुड़ का भोग जरूर लगाएं। विष्णु भगवान को गुड़ बहुत प्रिय है इसलिए पूजन सामग्री में गुड़ जरूर रखें। साथ ही इस केले के पेड़ की पूजा कर उसमें धूप और दीप से आरती करें। इससे भगवान विष्णु प्रसन्न होते हैं।

।।आप सभी को पद्मनाभ द्वादशी की हार्दिक बधाई व शुभकामनाएं।।

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