Gopashtami 2021: जाने कब है गोपाष्टमी,क्या है शुभ तिथि मुहूर्त

 

Dharm Desk/tbc/Gopashtami 2021: कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष के आठवें दिन गोपाष्टमी का त्यौहार सनातन मतावलंबी बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाते हैं । यह त्योहार गौ माता की पूजा और प्रार्थना करने के लिए समर्पित एक पवित्र त्योहार है। इस दिनलोग गौ माता के प्रति कृतज्ञता और सम्मान प्रदर्शित करते हैं जिन्हें जीवन देने वाला माना जाता है।सनातन हिंदू धर्म,संस्कृति मेंगायों को गौ माता’ कहा जाता है और उनकी देवी की तरह पूजा की जाती है। बछड़ों और गायों की पूजा और प्रार्थनाऐं करने का अनुष्ठान गोवत्स द्वादशी के त्यौहार के समान है जो कि देश के समस्त हिस्सों में मनाया जाता है।

गोपाष्टमी की तिथि और शुभ मुहूर्त

दिनांक: 10 नवंबर, 2021

अष्टमी तिथि प्रारंभ - 06:49 पूर्वाह्न 10 नवंबर, 2021

अष्टमी तिथि समाप्त - 05:51 पूर्वाह्न 11 नवंबर, 2021

धर्म शास्त्रों में ऐसा वर्णन मिलता है कि जब भगवान श्री कृष्ण पौगंड अवस्था में पहुँचेतब गोपाष्टमी के दिन नंद महाराजा ने गायों और श्रीकृष्ण जी के लिए एक समारोह किया। यह श्री कृष्ण और भाई बलराम के लिए गायों को पहली बार चराने के लिए ले जाने का दिन था। गोपाष्टमीदीपावली के दौरान आने वाला प्रसिद्ध त्यौहार गोवर्धन पूजा के बाद मनाया जाता है।

गाय का दूधगाय का घीदहीछांछ यहाँ तक की मूत्र भी मनुष्य जाति के स्वास्थ्य के लिए लाभदायक हैं। गोपाष्टमी त्योहार हमें बताता हैं कि हम सभी अपने पालन के लिये गाय पर निर्भर रहते हैं इसलिए वो हमारे लिए पूज्यनीय हैं। और हिन्दू संस्कृतिगाय को माँ कहा गया है,गाव: विश्वस्य मातर:

गोपाष्टमी पर्व से जुडी प्रसिद्ध पौराणिक कथा !

ऐसा वर्णन मिलता है कि जब कृष्ण भगवान ने अपने जीवन के छठे वर्ष में कदम रखा। तब वे अपनी मैया यशोदा से जिद्द करने लगे कि वे अब बड़े हो गये हैं और बछड़े को चराने के बजाय वे गैया चराना चाहते हैं। उनके हठ के आगे मैया को हार माननी पड़ी और मैया ने उन्हें अपने पिता नन्द बाबा के पास इसकी आज्ञा लेने भेज दिया। भगवान कृष्ण ने नन्द बाबा के सामने जिद्द रख दी कि अब वे गैया ही चरायेंगे। नन्द बाबा गैया चराने के मुहूर्त के लिएशांडिल्य ऋषि के पास पहुँचेबड़े अचरज में आकर ऋषि ने कहा किअभी इसी समय के आलावा कोई शेष मुहूर्त नहीं हैं अगले बरस तक। शायद भगवान की इच्छा के आगे कोई मुहूर्त क्या था। वह दिन गोपाष्टमी का था। जब श्री कृष्ण ने गैया पालन शुरू किया। उस दिन माता ने अपने कान्हा को बहुत सुन्दर तैयार किया। मौर मुकुट लगायापैरों में घुंघरू पहनाये और सुंदर सी पादुका पहनने दी लेकिन कान्हा ने वे पादुकायें नहीं पहनी। उन्होंने मैया से कहा अगर तुम इन सभी गैया को चरण पादुका पैरों में बांधोगी तब ही मैं यह पहनूंगा। मैया ये देख भावुक हो जाती हैं और कृष्ण बिना पैरों में कुछ पहने अपनी गैया को चारण के लिए ले जाते। गौ चरण करने के कारण हीश्री कृष्णा को गोपाल या गोविन्द के नाम से भी जाना जाता है।

गोपाष्टमी पूजा विधि

सुबह ही गाय और उसके बछड़े को नहलाकर तैयार किया जाता है। उसका श्रृंगार किया जाता हैंपैरों में घुंघरू बांधे जाते हैं,अन्य आभूषण पहनायें जाते हैं।

गौ माता के सींगो पर चुनड़ी का पट्टा बाधा जाता है

सुबह जल्दी उठकर स्नान करके गाय के चरण स्पर्श किये जाते हैं।

गाय माता की परिक्रमा भी की जाती हैं। सुबह गायों की परिक्रमा कर उन्हें चराने बाहर ले जाते है।

इस दिन ग्वालों को भी दान दिया जाता हैं। कई लोग इन्हें नये कपड़े दे कर तिलक लगाते हैं।

शाम को जब गाय घर लौटती हैतब फिर उनकी पूजा की जाती हैउन्हें अच्छा भोजन दिया जाता है। खासतौर पर इस दिन गाय को हरा चाराहरा मटर एवं गुड़ खिलाया जाता हैं।

जिनके घरों में गाय नहीं होती है वे लोग गौ शाला जाकर गाय की पूजा करते हैउन्हें गंगा जलफूल चढाते हैदिया जलाकर गुड़ खिलाते है। गौशाला में खाना और अन्य समान का दान भी करते है।

औरतें कृष्ण जी की भी पूजा करती हैगाय को तिलक लगाती है। इस दिन भजन किये जाते हैं। कृष्ण पूजा भी की जाती हैं।

।।आप सभी को गोपाष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएं व बधाई।।

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