Shani Jayanti 2022: शनि जयंती पर बन रहा 30 साल बाद खास संयोग, जानिए क्या है शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

 

Dharm Desk/tbc/Shani Jayanti 2022: ज्येष्ठ का महीना हनुमान जी और शनिदेव दोनों को बहुत ही प्रिय है। कहते हैं कि इस महीने में इनकी की गई अराधना बहुत ही फलदायी मानी जाती है। बड़े से बड़ा कष्ठ इस महीने में की गई हनुमान जी और शनिदेव की अराधना से कट जाता है। इस महीने में आने वाले चारों मंगलवार का विशेष महत्व है। इन मंगलवार को बड़ा मंगलबुढ़वा मंगल कहते हैं। शनि जयंती पर शनि की साढ़े साती और शनि ढैया और कार्लसर्प वाले जातकों को शनिदेव की पूजा बहुत फल देती है। यह भी मान्यता है कि इसी महीने में रामभक्त हनुमान अपने आराध्य से मिले थे।

ऊं शं शनैश्चराय नमः । न्याय के देवता शनि देव की जयंती हर वर्ष ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को मनाई जाती है। पौराणिक धर्म ग्रंथों और कथाओं के अनुसारज्येष्ठ अमावस्या तिथि को कर्मफलदाता शनि देव का जन्म पिता सूर्य देव एवं माता छाया के घर हुआ था। ज्येष्ठ अमावस्या को शनि अमावस्या और शनि जयंती के नाम से भी जानते हैं। आपको बता दें कि इस वर्ष शनि जयंती 30 मई दिन सोमवार को मनाई जाएगी। सोमवार की अमावस्या को सोमवती अमावस्या कहते हैं। इस दिन स्नान और दान का विशेष महत्व होता है।

30 साल बाद शनि जयंती पर बन रहा खास संयोग

आपको बता दें कि इस बार शनि जयंती का दिन बेहद खास है। क्योंकि इस बार सोमवती अमावस्या के साथ-साथ वट सावित्री व्रत भी रखा जाएगा। दरअसल ऐसा संयोग करीब 30 सालों बाद बन रहा है। जब शनिदेव अपनी राशि कुंभ राशि में रहेंगे। इसके साथ ही इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग भी बन रहा है।

शनि जयंती कब मनाई जाएगी ?

इस साल 30 मई, 2022 को शनि जयंती मनाई जाएगी।

शुभ मुहूर्त

अमावस्या तिथि प्रारम्भ - मई 29, 2022 को 02:54 पी एम बजे

अमावस्या तिथि समाप्त - मई 30, 2022 को 04:59 पी एम बजे

शनि जयंती पूजा विधि

अमावस्या के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर सभी कामों से निवृत्त होकर स्नान कर लें।

शनिदेव का स्मरण करते हुए व्रत का संकल्प करें।

एक चौकी पर साफ नया काले रंग का वस्त्र बिछाकर शनिदेव की तस्वीर या फिर प्रतीक के रूप में सुपारी रख दें।

पंचगव्य और पंचामृत से स्नान कराएं और फिर सिंदूरकुमकुमकाजल लगाने के साथ नीले रंग के फूल अर्पित करें।

शनीदेव को श्री फल सहित अन्य फल चढ़ाएं। साथ ही सरसों का तेलतिल भी चढ़ाएं।

अंत में दीप जलाकर शनिदेव का ध्यान करते हुए शनि चालीसा के साथ-साथ शनि मंत्र का भी जाप करें । अंत में आरती करने के साथ भूल चूक के लिए माफी मांगें।

शनि जयंती पर शनि देव को प्रसन्न करने के लिए इन मंत्रों का करें जप

"ऊं शं अभयहस्ताय नमः"

" ॐ निलान्जन समाभासं रविपुत्रं यमाग्रजम। छायामार्तंड संभूतं तं नमामि शनैश्चरम॥ "

ऊं शं शनैश्चराय नमः

ऊं प्रां प्रीं प्रौ स: शनैश्चराय नमः

इन मंत्रों का जाप करते हुए शनि जयंती के दिन भगवान शनिदेव की आराधना करें। ऐसा करने से समस्त पाप नष्ट होते हैं और गृह क्लेश से शांति होगी, कारोबार में वृद्धि, के साथ धन,संपदा में वृद्धि होगी।

।। आप सभी को शनि जयंती की हार्दिक शुभकामनाएं व बधाई।।

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