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Friday, 16 September 2016 22:39

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Vedic Sanskriti

     भगवान आशुतोष का आशीर्वाद

जी हाँ इस वर्ष सावन महीने में कृष्ण पक्ष पंचमी तिथि जिसे दक्षिण भारत में नागपंचमी के रूप में मानते हैं को हस्त नक्षत्र,सर्वार्थ सिद्धि योग,अमृत सिद्धि योग एवं रविवार पढ़ रहा है अतः जिन की कुंडली में 1-2-5-9-12 भाव में शनि,राहू या केतु हों या सूर्य,चन्द्रया बृहस्पति क्रूर ग्रहों से संयुक्त या दृष्ट हो एवं गुरु नीच राशि या नवांश में,नवम भाव में शुक्र+बृहस्पति हों,सूर्य-शनि सम सप्तक यानि आमने-सामने होंया लग्न पापी ग्रह से पीड़ित हो तो  पित्री दोष माना ! यदि कुंडली में सभी ग्रह राहू-केतु के मध्य स्थापित हों तो कालसर्प योग माना गया ऐसे सभी जातकों के लिए ये दिन विशेष उपहार एवं अवसर है अतः इस दिन निम्न कर्म यथा शक्ति पूर्ण करें लाभ रहेगा

१.जो (barley) को पीस कर छान कर उसमें दूध+दहीं+शहद मिला कर एक सो आठ गोलियाँ बना लें फिर शुद्ध कोरी थाली में या पत्ते पर इन गोलियों को नाग (सांप) का आकार बना कर रखलें पितरों की तृप्ति की प्रार्थना करते हुए नाग देवता की पंचोपचार पूजन करें पेठे की मिठाई का परशाद एवं दूध अर्पण करें मंत्र की एक या अधिक माला का जप करें पितरों की प्रसन्नता के लिए अन्न एवं जल दान करें फिर इन सभी नाग देवों को दूध परशाद सहित बहते जल में श्रद्धा के सहित प्रवाह करें घर आकर हाथ मुंह धो लें  

२.भगवान शिव का पंचोपचार पूजन करें ओं नमः शिवाये मन्त्र का निरंतर जाप करते हुए शिव पिंडी (शिव लिंग) पर १.दूध २.दहीं ३.घी ४.शहद ५.शक्कर चढाएं हर् वास्तु अर्पण के बाद तीन बार शिव लिंग पर पीतल/ताम्बा/चांदी के चम्मच से जल अर्पण करें फिर शुद्ध जल/गंगा जल से श्नान करें फिर यज्ञोपवीत पहनाएं दो बार मोली वस्त्र-उपवस्त्र के लिए अर्पण करें चन्दन का त्रिपुंड लगाएं लाल चन्दन एवं केशर युक्त तिलक लगाएं अब विल्वपत्र चढाएं पत्ते का कोमल चिकना हिस्सा निचे की और करके लिंग पर मन्त्र सहित अर्पण करें (बेल पत्र को बार बार धोकर भी चढ़ाया जा सकता है ऐसी शास्त्र अनुमति है) उपलब्ध हो तो शम्मी पत्र भी अर्पण करें श्वेत पुष्प एवं लाल पुष्प दोनों अर्पण करें फल एवं घर का बना प्रशाद+दक्षिणा अर्पण करें अब महामृत्युंजय मन्त्र का यथा शक्ति जाप करें अधि संख्या में जप के कुछ शास्त्र संवत मंत्र हैं .१ ह्रोम २.ओं जूम सह ३.ओं वम ज़ूम सह कोई भी एक मन्त्र या सम्पूर्ण मन्त्र का जाप करें जाप के बाद समस्त पूजा शिव अर्पण कर दें

विशेष:शिव पिंडी से स्पर्श हुआ प्रशाद केवल गुरु प्रदत्त शिव मन्त्र दीक्षित साधक जो किसी अन्य देव को इष्ट न मानता हो ही ग्रहण करने का अधिकारी है अन्यथा इस सभी पर शिव गन का अधिकार है !

2.श्री दुर्गा सप्तशती के अनुसार  माँ पराशक्ति अपने मस्तक पर सर्प सहित शिवलिंग धारण किये हुए हैं जो प्रकृति एवं पुरुष का संयोग है इसी लिए इस स्वरूप को साकार होते हुए भी निराकार माना जाता है ये भ्रान्ति है की ये शरीर धारी श्री शिव के लिंग का प्रतीक है अतः इन शिवलिंग स्वरूप की पूजा स्पर्श एवं अभिषेक में स्त्रियों का भी पुरुष के सामान ही अधिकार हैं 

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