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Thursday, 20 July 2017 05:20

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भगवान शिव के अनेक नाम हैं और अनेक रुप... इन सारे नाम रुपों का अलग अलग धार्मिक और दार्शनिक महत्व है... इन्ही में एक है भगवान शिव का अर्धनारीश्वर स्वरुप... ब्रह्मा को सृष्टि के विकास का मंत्र देने के लिए भगवान शिव अर्धनारीश्वर स्वरुप में प्रकट हुए थे... आइए भगवान शिव के प्रिय महीने सावन में उनके इस अर्धनारीश्वर स्वरुप को जानते हैं... 

सावन... शिव उपासना का महीना... शिव और शक्ति के मिलन का महीना... और इसीलिए सावन में शिव के साथ शक्ति की भी पूजा होती है... शिव और शक्ति दोनों एक हैं... एक दूसरे के पूरक... सतत अभिन्न... जहां शिव हैं वहां शक्ति भी है... शिव और शक्ति की इसी अभिन्नता को प्रमाणित करता है शिव का अर्धनारीश्वर रूप...अर्धनारीश्वर यानी नर-नारी का संयुक्त अविभाजित स्वरुप... इस स्वरुप मे आधे नर और आधे नारी के रुप में होते हैं देवाधिदेव... इसीलिए कहलाते हैं अर्धनारीश्वर शिव...

भगवान शिव का अर्धनारीश्वर स्वरुप सृष्टि की सतत गतिशीलता को भी बताता है... पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक सृष्टि के निर्माण का उत्तरदायित्व संभालने वाले ब्रह्मा ने जब सृष्टि की रचना की तो उनके सामने एक कठिन समस्या खड़ी हो गई... उन्होने पाया कि उनकी रचनाएं तो अपने जीवनोपरांत नष्ट हो ही जाएंगी और उन्हे बार बार नए सिरे से सृष्टि की रचना करनी पड़ेगी... इस समस्या के समाधान के लिए उन्होने भगवान शिव की कठिन तपस्या की, जिसके बाद भगवान शिव ने अर्धनारीश्वर रुप में प्रकट होकर ब्रह्मा की समस्या को दूर किया और  सृष्टि के सतत विकास का मूलमंत्र दिया...

स्त्री और पुरुष दोनों बराबर हैं फिर भी समाज में ज्यादातर स्त्री की बनिस्पत पुरुष को ही श्रेष्ठ समझा जाता है... मानव निर्मित समाज की इस अवधारणा को भगवान शिव अपने अर्धनारीश्वर स्वरुप के जरिए खारिज करते हैं... भगवान शिव का अर्धनारीश्वर स्वरुप दुनिया में स्त्री और पुरुष के बराबर होने की भी घोषणा है...  स्त्री और पुरुष एक दूसरे के बगैर अधूरे हैं इसे भगवान शिव ने अपने इस स्वरुप के जरिए सृष्टि की उत्पत्ति के समय ही बता दिया था...

 

आस्था के महीने सावन में अर्धनारीश्वर शिव की उपासना कई तरह की सिद्धियां प्रदान करती हैं... इस एक अर्धनारीश्वर स्वरुप की पूजा से शिव और शिवा दोनों की पूजा साथ हो जाती है... इसीलिए सावन में भगवान शिव के अर्धनारीश्वर स्वरुप की उपासना पूरी आस्था और श्रद्धा के साथ की जाती है... आदिदेव महेश्वर और भगवती आदिशक्ति की संयुक्त कृपा एकसाथ अर्धनारीश्वर के उपासकों पर बरसती रहती है...

 

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