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रबिन्द्रनाथ टैगोर के अनमोल विचार

Saturday, 28 April 2018 06:53

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रबिन्द्रनाथ टैगोर एक ऐसा व्यक्तित्व जिसे शब्दों मे, बया करना बहुत ही कठिन है . रबिन्द्रनाथ टैगोर जिनके बारे मे, कुछ भी लिखना या बताने के लिये, शब्द कम पड़ जायेंगे . ऐसे अद्भुत प्रतिभा के धनी थे, जिनके सम्पूर्ण जीवन से, एक प्रेरणा या सीख ली जा सकती है. वे एक ऐसे विरल साहित्यकारों मे से एक है जो, हर कहीं आसानी से नही मिलते . कई युगों के बाद धरती पर जन्म लेते है और, इस धरती को धन्य कर जाते है . वे एक ऐसी छवि है जो, अपने जन्म से लेकर मत्यु तक, कुछ ना कुछ सीख देकर जाते है . यह ही नही बल्कि, ऐसे व्यक्तित्व के धनी लोग म्रत्यु के बाद भी, एक अमर छाप छोड़ कर जाते है . जिसकी सीख व्यक्ति आज तक ले सकता है.

 

रबिन्द्रनाथ टैगोर अपने आप मे, बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे . कोलकाता के जोड़ासाकों की ठाकुरबाड़ी मे, प्रसिद्ध और समृद्ध बंगाली परिवार मे से, एक था टैगोर परिवार . जिसके मुखिया देवेन्द्रनाथ टैगोर जोकि, ब्रम्ह समाज के वरिष्ठ नेता थे , वह बहुत ही सुलझे हुए और सामाजिक जीवन जीने वाले व्यक्ति थे. उनकी पत्नी शारदादेवी, बहुत ही सीधी और घरेलू महिला थी. 7 मई 1861 को, उनके घर पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई . जिनका नाम रबिन्द्रनाथ रखा , यह उनके सबसे छोटे पुत्र थे . बड़े होकर यह 

 

1. सिर्फ तर्क करने वाला दिमाग एक ऐसे चाक़ू की तरह है जिसमे सिर्फ ब्लेड है. यह इसका प्रयोग करने वाले के हाथ से खून निकाल देता है.

2. आयु सोचती है, जवानी करती है.

 3. कट्टरता सच को उन हाथों में सुरक्षित रखने की कोशिश करती है जो उसे मारना चाहते हैं.

 4. पंखुडियां तोड़ कर आप फूल की खूबसूरती नहीं इकठ्ठा करते.

 5. मौत प्रकाश को ख़त्म करना नहीं है; ये सिर्फ दीपक को बुझाना है क्योंकि सुबह हो गयी है.

 6. मित्रता की गहराई परिचय की लम्बाई पर निर्भर नहीं करती .

 7. किसी बच्चे की शिक्षा अपने ज्ञान तक सीमित मत रखिये, क्योंकि वह किसी और समय में पैदा हुआ है.

 8. मिटटी के बंधन से मुक्ति पेड़ के लिए आज़ादी नहीं है

 9. हर बच्चा इसी सन्देश के साथ आता है कि भगवान अभी तक मनुष्यों से हतोत्साहित नहीं हुआ है.

 10. हर एक कठिनाई जिससे आप मुंह मोड़ लेते हैं,एक भूत बन कर आपकी नीद में बाधा डालेगी.

 11. जो कुछ हमारा है वो हम तक आता है ; यदि हम उसे ग्रहण करने की क्षमता रखते हैं.

 12. तथ्य कई हैं पर सत्य एक है.

 13. आस्था वो पक्षी है जो सुबह अँधेरा होने पर भी उजाले को महसूस करती है.

 14. मंदिर की गंभीर उदासी से बाहर भागकर बच्चे धूल में बैठते हैं, भगवान् उन्हें खेलता देखते हैं और पुजारी को भूल जाते हैं.

 15. वो जो अच्छाई  करने में बहुत ज्यादा व्यस्त है ,स्वयं अच्छा होने के लिए समय नहीं निकाल पाता.

 16. मैं एक आशावादी होने का अपना ही संसकरण बन गया हूँ. यदि मैं एक दरवाजे से नहीं जा पाता तो दुसरे से जाऊंगा- या एक नया दरवाजा बनाऊंगा. वर्तमान चाहे जितना भी अंधकारमय हो कुछ शानदार सामने आएगा.

17. मैं सोया और स्वप्न देखा कि जीवन आनंद है. मैं जागा और देखा कि जीवन सेवा है. मैंने सेवा की और पाया कि सेवा आनंद है.

18. यदि आप सभी गलतियों के लिए दरवाजे बंद कर देंगे तो सच बाहर रह जायेगा.

19. कला में व्यक्ति खुद को उजागर करता है कलाकृति को नहीं.

20. हम ये प्रार्थना ना करें कि हमारे ऊपर खतरे न आयें, बल्कि ये करें कि हम उनका सामना करने में निडर रहे.

21. जीवन हमें दिया गया है, हम इसे देकर कमाते हैं.

22. प्रेम अधिकार का दावा नहीं करता , बल्कि स्वतंत्रता देता है.

23. केवल प्रेम ही वास्तविकता है , ये महज एक भावना नहीं है.यह एक परम सत्य है जो सृजन के ह्रदय में वास करता है

24. संगीत दो आत्माओं के बीच के अनंत को भरता है.

25. जब मैं खुद पर हँसता हूँ तो मेरे ऊपर से मेरा बोझ कम हो जाता है.

26. तितली महीने नहीं क्षण गिनती है, और उसके पास पर्याप्त समय होता है.

27. अकेले फूल को कई काँटों से इर्ष्या करने की ज़रुरत नहीं होती.

28. उच्चतम शिक्षा वो है जो हमें सिर्फ जानकारी ही नहीं देती बल्कि हमारे जीवन को समस्त अस्तित्व के साथ सद्भाव में लाती है.

29. बर्तन में रखा पानी चमकता है; समुद्र का पानी अस्पष्ट होता है. लघु सत्य स्पष्ठ शब्दों से बताया जा सकता है, महान सत्य मौन रहता है.

30. जिनके स्वामित्व बहुत होता है उनके पास डरने को बहुत कुछ होता है.

31. मुखर होना आसान है जब आप पूर्ण सत्य बोलने की प्रतीक्षा नहीं करते.

32. पृथ्वी  द्वारा स्वर्ग से बोलने का अथक प्रयास हैं ये पेड़.

33. हम महानता के सबसे करीब तब होते हैं जब हम विनम्रता में महान होते हैं.

34. हम तब स्वतंत्र होते हैं जब हम पूरी कीमत चुका देते हैं.

35. हम दुनिया में तब जीते हैं जब हम उसे प्रेम करते हैं.

36. कला क्या है ? यह इंसान की रचनात्मक आत्मा की यथार्थ के पुकार के प्रति प्रतिक्रिया है.

37. सिर्फ खड़े होकर पानी देखने से आप नदी नहीं पार कर सकते.

38. आपकी मूर्ती का टूट कर धूल में मिल जाना इस बात को साबित करता है कि इश्वर की धूल आपकी मूर्ती से महान है.

 

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